उभांव थाना क्षेत्र के तुर्तीपार गांव में पुराने विवाद को लेकर मारपीट के मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ बीके लाल की अदालत ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा दो-दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर तीन-तीन माह की सजा के अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक वादी जयराम ने 13 नवंबर 2012 को उभांव थाने में तहरीर दी थी कि सुबह साढ़े सात बजे पुरानी रंजिश को लेकर गांव के ही मुन्ना राम, शिवमुनि, जितेंद्र उर्फ अविनाश तथा परमीना देवी मेरे माता पिता और मुझको गाली देने लगे। जब मना किया तो सभी आगबबूला होकर मुझे लात, मुक्का, लाठी-डंडा से पीटकर घायल कर दिए। इस दौरान मेरे माता-पिता को काफी चोटें आईं तथा मेरी मां वहीं गिरकर बेहोश हो गई। इस मामले में पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर दिया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों तथा दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने के उपरांत कोर्ट ने अभियुक्त मुन्ना राम, शिवमुनि राम तथा परमीना देवी के खिलाफ दोष साबित पाते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास तथा दो-दो हजार अर्थदंड से दंडित किया, जबकि 323 तथा 504 में एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास तथा पांच-पांच सौ रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अभियुक्त जितेंद्र उर्फ अविनाश को किशोर मानते हुए उसकी पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड को प्रेषित कर दी गई।