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आज भी विद्युतीकरण से वंचित 30 प्रतिशत विद्यालय

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बलिया। शासन के प्रदेश में बेहतर शिक्षा के दावे हवा हवाई साबित हो रहे। हद तो यह कि साठ फीसदी बच्चे अभी भी फर्श पर बैठने को मजबूर हैं और 30 प्रतिशत विद्यालयों में आज तक विद्युतीकरण तक नहीं हो सका है। कहीं एमडीएम राम भरोसे है तो कहीं विद्यालयों में पशुओं का अड्डा है। ले दे कर कहा जा सकता कि जनपद में प्राइमरी शिक्षा का स्तर फिसड्डी होता जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, जनपद में लगभग 1600 प्राइमरी स्कूलों में दो लाख 30 हजार बच्चों का भविष्य का भरोसा नहीं। लेकिन इन विद्यालयों खस्ताहाल से इनका भविष्य का निर्वाण कैसे हो रहा है। इसका अंदाजा आप इसी लगा सकते हैं कि आज भी फोर जी के जमाने में 30 फीसदी स्कूलों पर विद्युतीकरण का कार्य नहीं हुआ है। बानगी के तौर पर हसनपुरा प्राइमरी स्कूल में कमरों में लाइट की व्यवस्था नहीं होने के कारण गुरुजी बरामदमें बैठकर शिक्षा देते हैं। इसी प्रकार यदि बेंच, कुर्सी की बात की जाय तो जनपद के 60 प्रतिशत प्राइमरी स्कूल के बच्चे आज भी फर्श पर बैठकर पठन-पाठन करने को विवश है। इसकी बानगी आपको शिक्षा क्षेत्र हनुमानगंज अंतर्गत थम्हनपुरा, इंदरपुर, अंजोरपुर में देखने को मिलेगी, जहां बच्चे आज भी फर्श पर बैठकर पठन-पाठन करने को विवश है। इस प्रकार यदि पीने के पानी के उपर गौर फरमाया जाय तो अधिकतर प्राइमरी विद्यालयों में लगे हैंडपंपों को रीबोर करने की आवश्यता है।

इनसेट....
पाठशाला बना आवारा पशुओं का अड्डा
बलिया। स्कूलों की सुरक्षा के मद्देनजर चहारदीवारी बहुत बड़ी समस्या है। निर्माण के समय जो चहारदीवारी बनी थी, आज भी वही चहारदीवारी है। किसी किसी स्कूलों में तो चहारदीवारी टूटकर पूरा खुला मैदान बन गया है तो कहीं-कहीं चहारदीवारी तिहारदीवारी बन गई है। जिससे कई पाठशाला ऐसी है जो आवारा पशुओं का अड्डाशाला बन गई है।
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इनसेट.....
एमडीएम का संचालन राम भरोसे
बलिया। बच्चों को तुदंरूस्त बनाने के लिए सरकार द्वारा अति महत्वाकांक्षी एमडीएम योजना का संचालन स्कूलों में राम भरोसे हैं। शायद ही किसी दिन होगा, जब मेन्यू के अनुसार बच्चों को भोजन मिलता है। फल और दूध मिले महीनों दिन बीत गए। इस पर प्रधानाध्यापकों का कहना है उन्हें समय से पैसे नहीं मिलते हैं। ऐसे में हम करें तो क्या करें।

कोट
प्राइमरी शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए हम प्रयासरत है। जो भी खामियां है, उसे दूर करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। जैसे-जैसे बजट आएगा, काम आगे बढ़ाया जाएगा।
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संतोष कुमार, बेसिक शिक्षाधिकारी
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