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कटान का दंश झेल रहे द्वाबावासी

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जयप्रकाशनगर। द्वाबा में हर साल गंगा व घाघरा की तीव्र लहरे मौत का तांडव करती है। बाढ़ व कटान से हजारों की आबादी तहस नहस हो जाती है , रिहायशी मकान नदी में विलीन हो जाता है। इतना ही नहीं बाढ़ की विभीषिका से हजारों एकड़ फसलें और व्यापक जनहानि होती है । सरकार द्वारा प्रति वर्ष बाढ़ के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च किए जाते हैं , लेकिन सरकार द्वारा आज तक इसका स्थाई हल नहीं निकाला गया ।
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द्वाबा क्षेत्र में गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित तटीय गांव केहरपुर , जगदेवा , सूघर छपरा , टेंगरही, गोपालपुर, शिवपुर कपूरदियर , बहुआरा , नौरंगा भवन टोला, भगवान टोला , रामपुर कोड़रहा आदि गांव हर साल डूबता है । जबकि घाघरा नदी से दतहां , गोपालपुर शिवपुर, माझा, नवका गांव , मानगढ़ , शिवाल , गोपालनगर , अधिसिजुआ , चाँददीयर , बकुल्हा, टोला फतेह राय, पलटू नगर, अठगांवा आदि गांवों में नदी का कहर टूटता रहा है। नदियों की उफनाती लहरों से प्रति वर्ष करीब डेढ़ लाख की आबादी का जन जीवन अस्त व्यस्त होता है। 2011 से 2015 तक सैकड़ों परिवारों के मवेशी नदी की उफनाती लहरो में समा गए । कृषि योग्य भूमि कुछ कटान की भेंट चढ़ गई तो वही ज्यादा तर फसले बाढ़ के पानी मे डूबकर नष्ट हो गईं। द्वाबा की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि दोनों तरफ से गंगा व घाघरा नदियां घेरती है। क्षेत्र के समाजसेवी सूर्यभान सिंह , ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दशरथ यादव , ग्राम प्रधान बच्चा जी यादव , ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वीरेन्द्र यादव आदि का कहना है कि अगर पक्के तटबंध का निर्माण हो तो एक साथ दो दो समस्याओं से निजात मिल सकती है ।
इनसेट.....
बाढ़ से बचाव के लिए टीमें गठित
जयप्रकाशनगर। भविष्य में आने वाली गंगा व घाघरा नदी की बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम सिंह द्वारा सर्वे कर पहले से ही बाढ़ से बचाव के लिए टीमें गठित कर दी गई है । जो क्षेत्रो में घूम घूम कर नावों का रजिस्ट्रेशन करना पहले से करना शुरू कर दिया है।
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