बलिया। नगर से सटे निधरिया स्थित शिव पंचमंदिर परिसर में चार दिनों से चल रहे शिव पंचायतन प्रतिष्ठात्मक श्री रुद्र महायज्ञ के दौरान मंदिर में बुधवार को श्रद्धालु भक्तों का तांता लगा रहा। मंगलवार की देरशाम प्रवचन में बाल संत प्रज्ञा शुक्ला ने लोगों को कथा का रसपान कराया।
उन्होंने नारद मोह की मार्मिक प्रस्तुति कर उनके काम, क्रोध और मोह व्याख्या की। कहा, एक बार नारद तप करने बैठ गए। उन्हें तप करते देख इंद्र भयभीत हुए और उन्होंने कामदेव को तपस्या भंग करने के लिए भेज दिया। जब कामदेव हर प्रकार युक्ति लगाने के बाद तपस्या भंग करने में विफल हो गए तब उन्होंने नारद के पास बैठकर उनका गुणगान शुरु कर दिया। नारद से कहा कि आप शिवजी से भी महान हैं। जब उनकी तपस्या भंग करने गया तो वे क्रोधित हो उठे थे। लेकिन आप ने तो काम, क्रोध और मोह को पूरी तरह से त्याग दिया। इतनी बात सुनकर नारद खुशी से गदगद हो जाते है। वे कैलाश पर्वत पर जाकर शिवजी से पूरी बात बताते हुए कहते हैं कि कामदेव ने कहा है कि मै आपसे भी बड़ा हूं। इतना सुनने के बाद भगवान भोले कहते हैं कि हे नारद तुम यह बात नारायण से नहीं बताना। लेकिन नारद को यह बात अच्छी नहीं लगी। उन्होेंने क्षीरसागर में पहुंचकर भगवान विष्णु से भी यही बात कह दी। जिसपर विष्णु ने सोचा कि यह नारद तो मेरा भक्त है। लेकिन उसके मन जो गलत मिथ्या है उसे तोड़ना ही पड़ेगा। उन्होने माया का जाल फैला दिया और विश्वमोहिनी का स्वयंवर रच दिया। जिसमें बड़े-बड़े राजाओं ने भाग लिया। तब नारद भी वहां पहुंच गए। उन्होंने देखा उनसे हर राजा सुंदर है। फिर उन्होंने भगवान विष्णु को बुलाया और कहा कि आप अपना रुप में मुझे दे दे। उन्होंने बानर का रुप दे दिया। जब विश्वमोहिनी जब आई तो नारद इधर-कूदने लगे। लेकिन वह किसी के गले में वरमाला नहीं डाली। जैसे ही भगवान विष्णु पहुंचे विश्वमोहिनी ने उनके गले में वरमाला डाला दिया।