बलिया। आखिरकार प्रशासन की नींद खुली और नौ साल बाद उसने रोजगार सेवकों की ट्रेनिंग शुरू कराई। मनियर ओर बांसडीह के 50 रोजगार सेवक इसमें शामिल हुए। अब तक जिले के 722 रोजगार सेवक अप्रशिक्षित चल रहे थे। लेकिन अब ट्रेनिंग शुरू होने से उनमें उम्मीद जगी है। खास बात यह कि बीते नौ जुलाई के अंक में अमर उजाला के पेज नंबर दो पर ‘रोजगार सेवकों की ट्रेनिंग के नाम पर आठ लाख गटक गए अधिकारी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। जिस परन प्रशासन हरकत में आया।
2009 में नियुक्ति के समय ही शासनादेश था कि एक सप्ताह के अंदर रोजगार सेवकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देकर योग्य बनाया जाय। फिर काम पर लगाया जाय। लेकिन जिले के जिम्मेदारी अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। नौ जुलाई को खबर छपने के बाद डीआरडीए हरकत में आया और आनन-फानन में दो ब्लाक बांसडीह और मनियर के कुल 50 रोजगार सेवकों को ट्रेनिंग शुरू कराई। आगामी 20 और 21 जुलाई को बेरूआरबारी और रेवती ब्लाक की ट्रेनिंग होनी है। उधर, रोजगार सेवकों को प्रशिक्षण मिलने से उनमें भी उत्साह है।
नरेगा के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए गांव-गांव में वर्ष 2009 में रोजगार सेवकों की नियुक्ति हुई थी। उस समय शासनादेश जारी हुआ था जनपद में तैनात किए गए रोजगार सेवकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देकर उनको कार्यपद्धति से निपुण किया जाय। तभी कार्य में पारदर्शिता आएगी। लेकिन इसको डीआरडीए ने दरकिनार कर दिया था।