बलिया। तहसीलों में डमी तहसीलदार व एसडीएम ही डिजिटल सिग्नेचर से ऑनलाइन मामलों का निस्तारण करते हैं। इन्हीं कर्मियों के जिम्मे प्रमाण पत्रों का निस्तारण भी है। डमी अधिकारियों की मनमानी से आलम यह है कि किसी को एक दिन में प्रमाण पत्र मिल जाता है तो किसी के आवेदन कई दिनों तक लंबित रहता है।
लाख प्रयास के बावजूद जिले के तहसीलों में प्रमाण पत्रों के आवेदन निस्तारण व अन्य ऑनलाइन सेवाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही है। बताया जाता है कि अधिकांश तहसीलों में कर्मचारी ही ऑनलाइन शिकायतों व प्रमाण पत्रों के आवेदनों का निस्तारण करते हैं। यह डमी अधिकारी ही प्रमाण पत्रों के आवेदनों को जांच के लिए संबंधित लेखपालों को जांच के लिए भेजते हैं और लेखपाल की जांच रिपोर्ट पर प्रमाण पत्र भी तहसीलदार या एसडीएम के डिजिटल सिग्नेचर से जारी करते हैं। तहसीलों में इन डमी अधिकारियों की ओर से खूब खेल किया जाता है। बताया जाता है कि प्रमाण पत्रों के आवेदनों के निस्तारण में खूब मनमानी की जाती है। खासकर सदर तहसील में अधिकारी की भूमिका निभाने वाले बाबू सेटिंग करके प्रमाण पत्रों के आवेदनों का निस्तारण करते हैं। सेटिंग वाले आवेदनों को गैर क्षेत्र के लेखपालों के यहां भेजा जाता है और अगले ही दिन जांच रिपोर्ट पर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है जबकि अन्य आवेदनों को कई दिनों बाद क्षेत्रीय लेखपालों के यहां भेजा जाता है और लेखपाल की जांच रिपोर्ट मिलने के कई दिन बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। यह खेल सदर तहसील में महीनों से चल रहा है और इस बाबत कई लोगों ने शासन से शिकायत की भी लेकिन अधिकारियों ने इस मामले में लीपापोती कर दी। कुछ दिनों पहले तहसीलदार राम नारायण वर्मा ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि व्यस्तता के चलते प्रमाण पत्रों के निस्तारण की जिम्मेदारी बाबू को दी गई है।
एसडीएम एके श्रीवास्तव का कहना है कि प्रमाण पत्रों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी नाजिर निवास को दी गई है लेकिन प्रमाण पत्र जारी करने का काम वह स्वयं करते हैं। प्रमाण पत्रों के लिए 20 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है और इसके समय सीमा में निस्तारण किया जा रहा है।