स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के लिए ग्रामीण इलाकों में पूर्व के बने शौचालयों के अलावा व्यक्तिगत शौचालयों की मरम्मत का कार्य शुरू हो गया है। पंचायती राज विभाग की ओर से चिह्नित 16 हजार शौचालयों की मरम्मत पर करीब छह करोड़ की धनराशि खर्च होगी। विभागीय अधिकारी के अनुसार अब तक 500 शौचालयों के लिए 18 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के ओडीएफ प्लस टू में गांवों को साफ सुथरा करने के लिए कई तरह की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। योजना के तहत खासकर शौचालयों के निर्माण व उपयोग पर काफी जोर है। करीब पांच माह पहले शासन ने ग्रामीण इलाकों में बने शौचालयों की स्थिति का सर्वे करने का निर्देश दिया था। यह भी निर्देश दिया कि जो शौचालय क्षतिग्रस्त या निष्प्रयोज्य हो गए हैं उन्हें ठीक किया जाए।
शासन की ओर से सर्वे का कार्य पंचायत सहायक एप से करने व ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर फोटो सहित अपलोड करने का प्रावधान किया गया था। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में कुल 16 हजार शौचालयों को चिह्नित किया गया है। शौचालयों की मरम्मत आदि के लिए विभाग की ओर से करीब छह करोड़ की कार्ययोजना बनाई गई है।
क्षतिग्रस्त व निष्प्रयोज्य शौचालयों का ब्योरा निर्धारित पोर्टल पर अपलोड किया गया है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि अब तक 18 लाख की लागत से 500 शौचालयों का ठीक किया गया है।
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यह है योजना
ग्रामीण इलाकों में पूर्व के वर्षों से निर्मित शौचालयों को ठीक करने के लिए शासन की ओर से ग्राम पंचायतों द्वारा 15 वें वित्त आयोग से धनराशि खर्च करने का प्रावधान किया गया है। इसमें 500 से अधिकतम पांच हजार रुपये प्रति शौचालय खर्च किया जा सकेगा।
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जिले में कुल 16 हजार शौचालयों को ठीक करने के लिए चिह्नित किया गया है। अब यह कार्य शुरु हो चुका है। ग्राम पंचायतों की ओर से धनराशि खर्च की जानी है। - शैलेश कुमार ओझा, जिला सलाहकार, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया।