बैरिया। स्थानीय तहसील के सोनबरसा मौजे में कटान पीड़ितों को पट्टा देने के लिए सरकार की ओर से खरीदी गई जमीन का गलत तरीके से रजिस्ट्री करा कर खतौनी में भूमि का मालिक बनकर कब्जा करने का मामला संज्ञान में आया है। इंटक जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने उपजिलाधिकारी बैरिया को प्रार्थना पत्र देकर भूमि खाली कराने की मांग की है। मामला संज्ञान में आने पर तहसील प्रशासन ने संबंधित आरोपी काश्तकार को नोटिस भेजा है।
वर्ष 1980 के बहुआरा ग्राम पंचायत के भुसौला ग्राम के कुछ घरों के कटान की भेंट चढ़ जाने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने सोनबरसा मौजा के गाटा संख्या 2684 को सरकार के नाम से रजिस्ट्री कराकर कटान पीड़ितों को पट्टा कर दिया था। कुछ पट्टाधारक तो जमीन पर काबिज हो गए और कुछ पट्टाधारक वहां नहीं गए। जबकि कुछ भूमि पर सिंचाई विभाग का डांक बंगला का निर्माण हो चुका है लेकिन आज भी करीब तीन एकड़ भूमि खाली है। आरोप है कि सरकार के नाम से खरीदी गई जमीन का नामांतरण भी सरकार के नाम से नहीं हो पाया। इससे उक्त भूमि खरीदे गए व्यक्ति के नाम से ही रह गया जिसका फायदा उठाकर वह औने-पौने दाम पर लच्छू टोला निवासी पंचानंद साह वगैरह को बिक्री कर दिया।
इसके बाद पंचानंद साह वगैरह की ओर से दाखिल खारिज करा लिया गया। इसकी जानकारी होने के बाद इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर उक्त सरकारी भूमि को खाली कराने की मांग करते हुए वहां कटान के मुहाने पर बसे लोगों को पट्टा करने और मामले में जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। उधर, शिकायती पत्र मिलने के बाद तहसील प्रशासन की ओर से पंचानंद वगैरह पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि को किस आधार पर खरीदी गई है। तहसीलदार ने खरीदी गई भूमि के संपूर्ण दस्तावेज के साथ तीन दिनों के अंदर उपस्थित होने को कहा है।
पांच माह बाद भी राज्यपाल के नाम से हस्तांतरण नहीं : शासन के निर्देश पर 58 कटान पीड़ितों को बसाने के लिए बहुआरा मौजे में 56.5 लाख रुपये में राज्यपाल के नाम खरीदी गई है लेकिन आज भी उक्त भूमि हस्तांतरण राज्यपाल के नाम से नहीं हो सका है और न ही सभी 58 कटान पीड़ितों को पट्टा ही दिया गया है।
बैरिया तहसीलदार रामनारायण ने कहा कि इंटक जिलाध्यक्ष विनोद सिंह की शिकायत पर आरोपियों को नोटिस भेजकर साक्ष्य के साथ तलब किया गया है। अगर आरोपी तीन दिनों के अंदर उपस्थित नहीं हुए या संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो उक्त भूमि सरकार की भूमि मान ली जाएगी।