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चार साल बाद भी परवान नहीं चढ़ा नमामि गंगे

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बलिया। गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए लागू की गई नमामि गंगे योजना चार साल बाद भी परवान नहीं चढ़ सकी है। योजना के तहत गंगा के किनारे स्थित गांवोें में शौचालय बनवाए जाने थे लेकिन कई गांवों में लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए गांवों के चयन में भी अनियमितता बरती गई और छूटे गांवों को शामिल नहीं किया गया। इसी तरह से गंगा में नालों का पानी जाने से रोकने की व्यवस्था करनी थी लेकिन यह कार्य भी पूरा नहीं हो सका।
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वर्ष 2014-15 में नमामि गंगे योजना लागू की गई। हालांकि वर्ष 2015-16 में यह योजना धरातल पर उतर सकी। इसके तहत गंगा किनारे के गांवों को शौचालय से संतृप्त करना था। इसके लिए पंचायत राज विभाग ने गंगा किनारे के पांच ब्लाकों सोहांव, दुबहड़, बेलहरी, मुरलीछपरा व बैरिया के कुल 41 गांवों का चयन किया जबकि सोहांव ब्लाक के ही भरौली, गोविंदपुर, पलियाखास आदि दर्जन भर गांवों को सूची में शामिल नहीं किया गया। कुल 27571 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य तय कर चयनित 41 गांवों को धनराशि उपलब्ध कराई गई लेकिन दो विभागों की खींचतान में शुरुआती दौर के आवंटित 4552 शौचालय पूरी तरह नहीं बन सके। वर्ष 2014-15 में शौचालय निर्माण की कुल लागत 9100 निर्धारित थी और इसमें पंचायती राज विभाग को 4600 और मनरेगा से 4500 का भुगतान होना था। स्थिति यह रही कि पंचायती राज विभाग ने धनराशि भेजने के बाद इसका संज्ञान ही नहीं लिया। विभागीय लोगों की मानें तो मनरेगा का भुगतान तभी संभव है जब किए गए कार्य की फीडिंग की जाए लेकिन अधिकांश ब्लाकों ने इसमें लापरवाही बरती लिहाजा मनरेगा से भुगतान नहीं हो सका। हालांकि वर्ष 2015-16 और 2016-17 में शासन ने नमामि गंगे के तहत शेष 23019 शौचालयों के निर्माण के लिए प्रति शौचालय 12 हजार की दर धनराशि भेजी लेकिन इसके बावजूद शौचालयों के निर्माण में मनमानी की गई। आलम यह है कि गंगा किनारे के अधिकांश गांव अभी तक शौचालय निर्माण से संतृप्त नहीं हो सके हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि लक्ष्य के सापेक्ष शौचालयों का निर्माण हो चुका है। नमामि गंगे योजना चार साल पहले लागू की गई। इसके तहत गंगा किनारे के गांवों को शौचालयों से संतृप्त किया जाना था। हालांकि बाद में सरकार की ओर से सभी गांवों में शौचालय निर्माण कराकर ओडीएफ करने का फरमान जारी हो गया। इसके तहत जिले के सभी गांवों में बेस लाइन सर्वे के अनुसार शौचालय आवंटित कर ओडीएफ घोषित कर दिया गया।
शौचालय निर्माण में गड़बड़ी हो चुकी है उजागर : बलिया। नमामि गंगे योजना के तहत शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी उजागर हो चुकी है। डेढ़ साल पहले तत्कालीन डीपीआरओ ने बैरिया ब्लाक के गंगा किनारे के दयाछपरा गांव का निरीक्षण किया था। इस गांव में 2013-14 में स्वच्छता अभियान के तहत प्रति शौचालय 4600 के हिसाब से कुल 10.35 लाख रुपये भेजे गए थे लेकिन मौके पर 78 शौचालय बने नहीं मिले। वर्ष 2014-15 में प्रति शौचालय 12 हजार के हिसाब से कुल 25.92 लाख की धनराशि भेजी गई लेकिन मौके पर केवल 16 शौचालय ही बने मिले। डीपीआरओ ने माना था कि निर्मित 163 शौचालय मानक के अनुरूप नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि ग्राम सचिव की ओर से आठ बार में अपने नाम से कुल 8.12 लाख का आहरण किया गया है। इस मामले में संबंधित सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। योजना के तहत शौचालय निर्माण में मानक की अनदेखी गई है। मानक के तहत शौचालय के लिए पानी की छोटी टंगी और इसका कनेक्शन शौचालय में होना चाहिए। जांच की जाए तो कई शौचालयों में यह व्यवस्था नहीं मिलेगी।
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कोट
नमामि गंगे योजना में सीवरेज व्यवस्था भी होनी थी और नगर विकास विभाग को नोडल बनाया गया था लेकिन 12 वर्ष बाद भी यह कार्य पूरा
सीवरेज योजना के सिविल लाइन जोन में पाइप डालने और एसटीपी का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। कार्यदायी संस्था के ठेकेदार को जल्द काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।-कायम हुसैन, अधिशासी अभियंता जल निगम, बलिया
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कोट
नमामि गंगे योजना के तहत गांवों में शौचालय निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। अन्य कार्य के लिए कार्ययोजना शासन को भेजी गई है।-बीएन सिंह, सीडीओ, बलिया
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