जयप्रकाश नगर। राष्ट्रीय राज मार्ग 31 की मांझी से बैरिया के बीच मरम्मत कराने की मांग लेकर आंदोलित युवाओं ने गुरुवार की सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक कुल 11 घंटे तक चक्काजाम किया। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में फंसे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के चलते धूप और भीषण गर्मी के चलते परेशान रहे। इसकी जानकारी होने पर एएसपी, सीओ मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने समझाया लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने। एनएएचआई के प्रोजेक्ट मैनेजर ने मरम्मत कराने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद शाम पांच बजे जाम खत्म हुआ।
एनएच 31 बैरिया मांझी मार्ग की मरम्मत कराने की मांग को लेकर क्षेत्र के युवाओं ने रविवार को दुर्ग विजय सिंह झलन के नेतृृत्व में आंदोलन शुरू किया। दो दिन क्रमिक अनशन और दो दिन आमरण अनशन के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो युवाओं ने गुरुवार को सुबह छह बजे एनएच 31 पर जयप्रकाशनगर में जाम लगा दिया। हालांकि आंदोलन के दौरान एसडीएम बैरिया ने युवकों से बात कर अनशन तोड़वाने की कोशिश की थी लेकिन युवक तैयार नहीं हुए। सुबह छह बजे जाम लगने के बाद कुछ ही घंटों में हाईवे के दोनों तरफ चारपहिया वाहनों की लंबी कतार लग गई। एनएच जाम होनेे की जानकारी होते ही एएसपी, सीओ व कई थानों की पुलिस बल पहुंच गई और युवाओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। शाम को करीब पांच बजे विधायक सुरेंद्र सिंह और एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर नवीन मिश्रा मौके पर पहुंचे। प्रोजेक्ट मैनेजर की ओर से एक सप्ताह के अंदर मरम्मत कार्य शुरू कराने के लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद युवाओं ने शाम पांच बजे जाम समाप्त कर दिया। इस मौके पर रामकुमार सिंह, विक्की सिंह, रणधीर सिंह, बबलू मिश्रा, गोलू मिश्रा, ऋषिकेश सिंह, उपेंद्र यादव, राहुल सिंह, राहुल यादव, भवानी सिंह, लालबहादुर शास्त्री आदि मौजूद रहे।
एक हजार ट्रकों की लगी कतार, परेशान रहे यात्री : जयप्रकाशनगर। एनएच 31 बैरिया मांझी मार्ग जाम के कारण दोनों तरफ करीब एक हजार ट्रकों की कतार लग गई। इस दौरान जहां ट्रक चालकों को सामने भोजन पानी की समस्या से जूझना पड़ा वहीं कई ट्रकों पर लदे कच्चे सामानों को लेकर ट्रक चालक काफी परेशान रहे। उधर, जाम में दूध, फल, आइसक्रीम आदि की गाड़ियां भी फंसी रहीं। जाम में फंसे यात्रियों को तल्ख धूप और भीषण गर्मी में परेशान होना पड़ा। यात्रियों को पानी तक नसीब नहीं हुआ। जाम में बसेें भी फंसी हुई थी जिनपर सवार यात्रियों को प्यास से व्याकुल होना पड़ा। निजी वाहन वाले तो खेतों के रास्ते किसी तरह अपने वाहनों से निकल गए लेकिन बड़े व किराया वाले वाहन फंसे रहे जिसके चलते यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी।