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प्रधान, तत्कालीन तहसीलदार समेत छह पर धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज

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गड़वार। गड़वार ग्राम पंचायत में आबादी की जमीन को कूटरचना से बंजर घोषित करने के बाद गलत तरीके से पट्टा आवंटित करने के मामले में ग्राम प्रधान, प्रधान पति, लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, नायब तहसील व तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में गड़वार पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर की है।
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गड़वार निवासी सुग्रीम प्रजापति ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) में प्रार्थना पत्र देकर बताया था वर्ष 1987 में गांव के भूमि प्रबंधक समिति की ओर से प्रस्ताव पारित कर मौजा गड़वार के अराजी नंबर 947 पर 70 व्यक्तियों को आवास के लिए तीन-तीन डिस्मिल भूमि आवंटित किया गया। इसका अनुमोदन भी तत्कालीन एसडीएम की ओर से किया गया था लेकिन गांव के कुछ लोगों ने आवंटियों के खिलाफ अपर जिलाधिकारी न्यायालय में वाद दायर कर आवंटन को चुनौती दी गई। काफी समय बाद मुकदमा खारिज हो गया। इसके बाद सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया जो कि वर्ष 2010 में खारिज हो गया।
मुकदमेबाजी के चलते कुछ पट्टाधारक जमीन पर काबिज हुए कुछ को कब्जा नहीं मिला। चकबंदी के दौरान उक्त अराजी का नया नंबर बना जो गड़वार फेफना मार्ग पर होने से कीमती हो गई। इसी जमीन पर पानी टंकी, प्राथमिक विद्यालय, पावर हाउस आदि बना है। वर्तमान प्रधान ललिता देवी, उनके पति ददन राम व हल्का लेखपाल बैजनाथ सिंह ने रजिस्टर पर फर्जी कार्यवाही दिखाकर एक अप्रैल 18 को 56 व्यक्तियों को जिसमें अधिकांश अपात्र हैं, को पात्र दिखाकर 40 से 50 हजार रुपये लेकर प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए बलिया तहसील भेज दिया। तहसील के कानूनगो मनोज सिंह, नायब तहसीलदार घनश्याम तिवारी, व तहसीलदार चंद्रभूषण प्रसाद ने बिना भूमि का भौतिक सत्यापन किए ही तीन व्यक्तियों का नाम काटकर 53 व्यक्तियों का पट्टा आवंटन करने की रिपोर्ट भेजते हुए 29 मई 18 को पट्टा स्वीकृत करा दिया। जबकि नियमानुसार पावर हाउस के 300 मीटर के आसपास आवास नहीं हो सकता। सीजेएम ने सुग्रीम प्रजापति के आवेदन को स्वीकार करते हुए मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया था। इसके अनुपालन में गड़वार पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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