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तिरंगा में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, मचा कोहराम

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शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव - फोटो : amar ujala
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रामगढ़। नागालैंड में भारत म्यामार सीमा पर आतंकवादियों के हमले में शहीद हुए आसाम राइफल के 40 बटालियन के जवान दीनानाथ ठाकुर का तिरंगे में लिपता पार्थिव शरीर सोमवार को आते बलिहार गांव में मातम छा गया। परिवार के लोग फफक कर रो रहे थे वहीं गांव और आसपास के क्षेत्रोें से जुटे हजारों लोगों ने शहीद जवान को नम आंखों से विदाई दी। करीब एक घंटे तक लोगोें ने लोगों के शहीद के पार्थिव शरीर के दर्शन किए। इसके बाद निकली शव यात्रा में शामिल हजारों लोग घाट पर पहुंचे। वहां गांव से सटे गंगा के गंगापुर घाट पर बड़े पुत्र आसाम राइफल के जवान राकेश ने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले सैनिकों ने गार्ड आफ आनर दिया।
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शहीद दीनानाथ ठाकुर का पार्थिव शरीर पहुंचते ही बुजुर्ग पिता रामधनी (80) बेसुध से हो गए। वे अपने लाल के पार्थिक शव को एक लगाए रहे। बेटे राकेश, राजेश और बिटिया ललिता सहित परिजनों का रोते रोते बुरा हाल था। दीनानाथ की मां लालमुनि पार्थिव शरीर से लिपट कर रो पड़ीं। यह दृश्य देखकर हर एक की आंखें नम हो गईं। दरवाजे पर करीब एक घंटे तक लोगों के शहीद का पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन किया। इसके बाद जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए गंगा नदी के गंगापुर घाट के लिए निकला लोगों का हुजूम पीछे-पीछे चल पड़ा। लोग भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा दीनानाथ तेरा नाम रहेगा.. के नारे लगाते रहे। गंगा के गंगापुर घाट पर आसाम राइफल के जवान बड़े पुत्र राकेश ने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले 39 जीटीसी के मेजर विजय सिंह धानक के नेतृत्व में सैनिकों ने शहीद के पार्थिव शरीर को गार्ड आफ आनर दिया।
इस दौरान प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर राज्य मंत्री उपेंद्र तिवारी, सांसद वीरेंद्र सिंह के भाई कन्हैया सिंह, विधायक सुरेंद्र के भाई परशुराम सिंह, पूर्व विधायक सुभाष यादव, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि अयोध्या प्रसाद हिंद, कांग्रेस नेता विनोद सिंह, प्रधान प्रतिनिधि सुनील मिश्र के अलावा प्रशासनिक अधिकारी एडीएम राम आसरे, एएसपी विजय पाल सिंह, एसडीएम अश्विनी कुमार श्रीवास्तव, विपिन कुमार जैन, तहसीलदार रामनारायण, एडिशनल एसपी उमेश कुमार समेत कई थानों की पुलिस ने पुष्प अर्पित कर शहीद को अंतिम विदाई दी।
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नगालैंड के मौन जिले के तांग सान्ग पोस्ट पर तैनात दीनानाथ ठाकुर शनिवार को दिन में करीब एक बजकर 20 पर इंडियन म्यांमार बार्डर पर उग्रवादियों से मोर्चा संभालते हुए शहीद हो गए थे। 54 वर्षीय दीनानाथ ठाकुर नायब सुबेदार के पद पर तैनात थे।
उठ, तहार छत्रछाया क जरूरत बा... : रामगढ़। शहीद दीनानाथ ठाकुर का पार्थिव शरीर जैसे ही दरवाजे पर पहुंचा अजीबो गरीब स्थिति पैदा हो गई। जहां राजेश, राकेश व ललिता के सिर से सात साल पहले ही मां शकुंतला देवी का साया उठ गया था, वहीं अब पिता की मौत से सभी असहज हो गए थे। वहीं बूढ़े मां बाप भी बेटे की मौत से विचलित थे। छोटा बेटा राजेश बार-बार शहीद के पार्थिव शरीर से लिपट कर कह रहा था कि उठ हमनी के कुछो ना चाही बस तहार छत्रछाया के जरूरत बा।
शहादत के दिन ही छोटे पुत्र से हुई थी बातचीत : रामगढ़। छोटे बेटे राजेश को क्या पता था कि पिता से आखिरी बात हो रही है, राजेश ने बताया कि शनिवार दिन के 10 बजे पापा से बातचीत हुई। उन्होंने घर पर चल रहे काम के बारे में बातचीत किया और अगले माह गर्मी की छुट्टी में आने की भी बात कह रहे थे। अभी वे 14 अप्रैल को ही छुट्टी बिताकर गांव से ड्यूटी पर गए थे।
दीनानाथ के मित्र नंदलाल यादव ने बताया कि दीनानाथ मृदुल स्वभाव के व्यक्ति थे। आज तक इनके साथ किसी के साथ वैराग नहीं रहा। हमेशा देश व गरीब की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते थे।
छोटे पोते को भी आसाम राइफल में भेजना चाहती है दादी : रामगढ़। बेटे की शहादत पर पिता रामधनी व मां लालमुनि देवी अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। उनका मानना था कि मेरा बेटा दुश्मनों के दांत खट्टे कर देश के लिए शहीद हो गया। शहीद की मां ने कहा कि देश के लिए मैं अपने छोटे पोते राजेश को भी आसाम राइफल में भेजना चाहती हूं ताकि वह देश के दुश्मनों से बदला ले सके।
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