रेवती। भूगर्भीय जलस्तर नीचे जाने के चलते हैंडपंप तथा नलकूपों के पानी में कमी आने लगी है। जिस रफ्तार से पानी आना चाहिए, उस रफ्तार से पानी नलकूपों में जहां नहीं आ रहा है वहीं हैंडपंप से भी पानी घट कर आ रहे हैं। नगर के मकानों पर लगे टंकियों तक पानी या तो बहुत धीमी गति से चढ़ रहा है या कभी-कभी चढ़ ही नहीं पाता है। लोगों की शिकायत है कि टंकियां जितने समय में कुछ ही दिन पूर्व भर जाया करती थीं अब उनमें काफी समय लग रहा है। अभी गर्मी के मौसम का प्रारंभिक समय चल रहा है।
इसी में भूगर्भीय जल का दबाव कम हो चला है। जो ताल, तलैये, पोखरे गड्ढे आदि पानी से भरे होते थे उनमें या तो नगर अथवा गांव के पास के नालियों का गंदा पानी नजर आता है या फिर वे सूख गये हैं। रेवती से गायघाट तक फैले विस्तृत दह रेवती की गहराई कम होती गई। इसमें सदैव पानी भरा रहता था वहां इसके एक भाग पर खेती हो रही है। कोल नाला, नारी तीर,नागा बाबा का पोखरा, बाजार का पोखरा, तिवारी खंड का पोखरा आदि सहित क्षेत्र के अन्य जलाशय नगर के सडे़ पानी और जलीय नरकटों से भरे पड़े हैं। जमीन के ऊपरी भाग के जल भंडार सूख गए। बरसात पर्याप्त मात्रा में हुई नहीं ऐसे में हैंडपंप का सूखना लाजिमी है। गर्मी का पूरा मौसम अभी शेष है। अभी से ही हैंडपंपों से पानी कम आने की सूचना एक खतरनाक संकेत है।