बलिया। वह दिन दूर नहीं जब नगरवासियों को महानगरों की भांति सीवरेज सुविधा का लाभ मिलेगा। वर्ष 2006-07 से अधर में लटके शहर में सीवरेज सुविधा के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को आगामी 12 जुलाई को प्रगति रिपोर्ट के साथ पेश होने को कहा है। ऐसे में लगभग 12 वर्षों से मूर्तरूप पाने को आतुर ‘ सीवरेज प्रोजेक्ट’ को लेकर जनपदवासियों में अब उम्मीद जगी है।
विगत 12 वर्षों में सपा, बसपा और अब भाजपा की सरकार में बलिया नगर में सीवरेज प्रोजेक्ट की ओर ध्यान नहीं दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि अब तक कुल 9691.71 लाख खर्च होने के बावजूद प्रोजेक्ट मूर्तरूप नहीं ले सका। इसे लेकर समय-समय पर समाजसेवी संगठनों ने आवाज भी बुलंद की। इसके बाद जिला प्रशासन कार्रवाई करते हुए बस जलनिगम के एक्सईएन को फटकार लगाई और ठेकेदार को तलब करने का काम किया। कार्य को आगे बढ़ाकर पूर्ण करने की दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया।
इधर, इसे लेकर भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने आरटीआई दाखिलकर जल निगम से सूचना मांगी। इस क्रम में जल निगम ने दिनांक दो नवंबर 2018 को सूचना उपलब्ध कराई कि बलिया नगर क्षेत्रांतर्गत सीवर पाइप बिछाने का कार्य वित्तीय वर्ष 2006-07 में प्रारंभ किया गया। उक्त सीवर परियोजना पर 31 मार्च 2018 तक शासन से कुल 96 करोड़ 91 लाख 71 हजार रुपये प्राप्त हुआ है। सीवर परियोजना का कार्य दो भागों सिटी जोन एवं सिविल लाइन जोन के माध्यम से कराया गया। सिटी जोन के कार्यों का फ्लो टेस्टिंग के बाद हस्तांतरण नगर पालिका परिषद को वर्ष 2012 में ही कर दिया गया। इस परिप्रेक्ष्य में जब नगर पालिका से आरटीआई के तहत जवाब मांगा गया। इस पर नगर पालिका ने दिनांक 14 जनवरी 2019 को सूचना उपलब्ध कराई। इसमें कहा गया कि अधिशासी अभियंता निर्माण खंड उप्र जल निगम के अनुसार नगर पालिका परिषद बलिया के सिटी जोन में फ्लोवर टेस्ट के उपरांत सीवर का कार्य पूर्ण होना बताकर नगर पालिका परिषद बलिया के तत्कालीक अधिशासी अधिकारी एवं अध्यक्ष महोदय को हस्तांतरण पत्र अधिशासी अभियंता द्वारा उपलब्ध कराया गया है।
ऐसा दावा जल निगम कर रहा है जबकि नगर पालिका स्पष्ट करता है कि उक्त कार्ययोजना से संबंधित नजरी नक्शा, आगणन, टेक ओवर कोई पत्रावली जलनिगम द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके बाद इंटक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की जिस पर हाईकोर्ट ने आगामी 12 जुलाई को प्रगति रिपोर्ट के साथ जिलाधिकारी को पेश होने फरमान सुनाया है।
कौन बोल रहा झूठ, एक्सईएन या फिर नपा के ईओ
बलिया। एक तरफ जल निगम के एक्सईएन कायम हुसैन ने दावा किया कि वर्ष 2012 में ही सिटी जोन की परियोजना फ्लो टेस्टिंग के बाद नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित कर दिया गया है। वहीं, दूसरी ओर नगर पालिका ईओ डीके विश्वकमा दावा किया कि ऐसा कोई हस्तांतरण का पत्र उन्हें अभी तक प्राप्त ही नहीं हुआ। सवाल उठता है कि आखिर कौन सहीं बोल रहे हैं और कौन झूठ बोल रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं जलनिगम द्वारा नगर पालिका को टेक ओवर के बाद नगर पालिका ने उसे अभी तक ठंडे बस्ते में डाल रखा। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए जल निगम द्वारा नगर पालिका पर आरोप मढ़ा जा रहा हो। खैर इस हस्तांतरित पत्र को लेकर भी इंटक के जिलाध्यक्ष जांच कराने की बात कही है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता कायम हुसैन ने कहा कि सिटी जोन की परियोजना फ्लो टेस्टिंग के बाद नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित कर दिया गया है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डीके विश्वकर्मा ने कहा कि जलनिगम का कोई लेटर नगर पालिका को प्राप्त नहीं हुआ है।