बलिया। जिले में 12 सालों से बन रहा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जल निगम के लिए पूरी तरह चारागाह बन चुका है। अभी तक पाइप लाइन के साथ ही शहर से करीब 14 किमी दूर बन रहे एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है। इस बीच इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने जल निगम के चेयरमैन को 17 सितंबर को शिकायती पत्र देकर बताया कि सीवेज की टेस्टिंग के नाम पर पूर्व एक्सईएन कायम हुसेन द्वारा तीन करोड़ का भुगतान कर गोलमाल किया गया है। यह भी बताया कि जबकि धरातल पर परियोजना पूरी नहीं हुई है। अपूर्ण परियोजना का हस्तांतरण कागजों पर ही नगर पालिका परिषद बलिया को कर दिया गया है। इस मामले की जांच जल निगम वाराणसी जोन के मुख्य अभियंता की अगुवाई में शुुरू हो चुकी है। अमर उजाला ने 22 मई को सीवेज व एसटीपी निर्माण में हुई धांधली का खुलासा किया था।
वर्ष 2005 में चार जून को तत्कालीन नगर विकास राज्य मंत्री ने सीवेज कार्य का शिलान्यास किया। कुल 130 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सीवर की स्वीकृति शासन ने वर्ष 2006-07 में देते हुए कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया। लेकिन इसके बाद से ही सीवर, विभाग के लिए चारागाह बन गया। वर्ष 2006-07 में कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से पूरे शहर में पाइप डाली गई और जगह-जगह मेनहोल बनाया गया। लेकिन इसमें करोड़ों का गोलमाल किया गया। वर्ष 2011 में विभाग ने यह दावा करते हुए काम बंद कर दिया कि सीवर का काम पूरा हो गया है जबकि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद एक बार फिर आनन-फानन में पाइप डालने का काम शुरू किया गया। इसके अलावा अप्रैल में शहर के घरों को सीवर से जोड़ने के लिए सभी गलियों की खुदाई कर पाइप डाली गई, लेकिन किसी भी गली का मरम्मत नहीं कराई गई। इसमें लाखों का गोलमाल किया गया। करीब आठ माह पहले विभाग के एक जेई की मौत को लेकर भी सीवर की गड़बड़ी व फर्जी भुगतान की चर्चा शुरू हुई थी लेकिन विभाग ने इस पर परदा डाल दिया।