रसड़ा। जनपद का एकमात्र औद्योगिक क्षेत्र रसड़ा शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। शासन द्वारा कताई मिल व चीनी मिल को अघोषित बंद कर दिए जाने से मजदूरों के साथ ही आसपास के लोग भी भुखमरी के कगार पर खड़े हो गए हैं। आलम यह है कि क्षेत्र के बेरोजगार युवक रोजगार के लिए दूसरी जगह पलायन कर रहे हैं।
जनपद के रसड़ा क्षेत्र में कताई मिल एवं चीनी मिल कांग्रेस शासन काल में स्थापित किए गए थे। वर्ष 1999 में शासन प्रशासन ने बीमार बताकर कताई मिल को बंद कर दिया था। जिसके बाद सैकड़ों मजदूर कताई मिल चालू करने के लिए आज भी आंदोलनरत हैं। यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि सरकार ने चीनी मिल को भी वर्ष 2012-13 में अघोषित बंद कर दिया। दोनों उद्योगों के बंद होने के कारण सैकड़ाें कर्मचारी व मजदूर दाने-दाने को मोहताज हो गए। इसकी मुख्य वजह प्रबंधतंत्र द्वारा लूट-खसोट बताया जाता है। चीनी मिल को वर्ष 1972 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिलान्यास किया था। जबकि वर्ष 1975-76 में जिलाधिकारी ने मिल का पेराई भी चालू कराया। जिसमें छह सौ से सात सौ के बीच डेलीवेज, सीजनल एवं स्थाई कर्मचारी कार्य करते थे। चीनी मील में प्रबंध तंत्र के लूट-खसोट का आलम था कि प्रतिवर्ष करोड़ों की घाटे में मिल चलने लगी। जिसके कारण मिल लगभग डेढ़ अरब से ऊपर के घाटे में हो गई। जिसके बाद अंतत: शासन ने वर्ष 2012-13 में पेराई सत्र को बंद कर दिया। आज चीनी मिल की मशीनें एवं सामान पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं।