बलिया। वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने की पहल वर्ष 2020 में शुरू की गई थी। इसको लगाने की समय सीमा भी गुजर गई, लेकिन अभी भी जिले में 10 हजार निजी वाहनों पर एचएसआरपी नहीं लग सके हैं। वहीं, करीब पांच हजार व्यावसायिक वाहनों पर भी एचएसआरपी नहीं लगे हैं।
सरकार की ओर से वाहन को सुरक्षा और अपराध में कमी लाने के लिए एचएसआरपी की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन लोग नियम नहीं मान रहे हैं। इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से निर्धारित शुल्क जमा कराया जाता है, इसके बाद प्लेट जारी होती है। नए वाहनों में तो प्लेटें नजर भी आ रही हैं। क्योंकि विभाग की ओर से जारी नियम के अनुसार, नए वाहन के पंजीकरण के दौरान ही फीस लेकर एचएसआरपी जारी कर दी जाती है, लेकिन अधिकांश पुराने वाहनों पर सामान्य नंबर प्लेट ही देखे जा सकते हैं। जिले में 2020 से अब तक यानी करीब चार साल में एक लाख 35 हजार वाहनों पर ही नई नंबर प्लेट लगवाई गई हैं।
बिना एचएसआरपी नहीं हो सकेगा कोई कार्य
परिवहन विभाग के आरआई राजभूषण चौधरी ने बताया कि वाहनों पर एचएसआरपी को लेकर सक्रियता बढ़ाई गई है। जिले में करीब एक लाख दो पहिया, करीब पचास हजार निजी व व्यावसायिक चार पहिया व ऑटो संचालित हो रहे हैं। इनमें से व्यावसायिक वाहनों में 90 फीसदी पर एचएसआरपी लग चुके हैं। निजी वाहनों में अब तक यह आंकड़ा 55 प्रतिशत ही है। 50 फीसदी बाइक के नंबर भी एचएसआरपी से लैस हो चुके हैं, जबकि मात्र 30 फीसदी ऑटो रिक्शा पर ही सुरक्षित नंबर प्लेट लगे हैं। बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट वाले वाहनों का आरटीओ से कोई कार्य नहीं हो सकेगा।
छह प्रकार के वाहनों पर अनिवार्य है प्लेट
सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट 1989 के नियम 50 के तहत वाहन पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। इस एक्ट के तहत कुल छह तरह के वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना होता है। इनमें नॉन ट्रांसपोर्ट व्हीकल, ट्रांसपोर्ट व्हीकल, किराये व कैब वाले ट्रांसपोर्ट व्हीकल, बैटरी से चलने वाले किराये व कैब वाले ट्रांसपोर्ट व्हीकल, बैटरी से चलने वाले नॉन ट्रांसपोर्ट व्हीकल और बैटरी से चलने वाले ट्रांसपोर्ट व्हीकल शामिल हैं। नए वाहनों के अलावा पुराने वाहनों पर भी इसे लगाना जरूरी है।
हादसे की मिल जाती है सारी जानकारी
अगर कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए तो ऐसे में वाहन में लगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट से वाहन के मालिक सहित सभी जानकारी आसानी से मिल जाती हैं। इससे वाहन सवार घायलों के परिजन तक जानकारी भेजी जा सकती है।
नए वाहन व एनओसी के साथ ही अन्य वाहन आने पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगवाई जा रहीं हैं। पुराने वाहनों में ही एचएसआरपी नहीं लग पा रही हैं। उन्हें चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है।-अरुण कुमार राय, एआरटीओ प्रशासन।