दुबहड़ ब्लॉक में रोजगार सेवकों की संख्या में गड़बड़झाला कर मानदेय भुगतान की जांच को लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों में सिर फुटौवल भी शुरू हो गया है। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप के साथ ही कहासुनी भी होने लगी है। अमर उजाला के खुलासा के आधार पर रोजगार सेवक की शिकायत पर मामले की जांच चल रही है।
दुबहड़ ब्लॉक में मनरेगा आयुक्त के निर्देश पर रोजगार सेवकों की संख्या में गड़बड़झाला कर मानदेय के गोलमाल करने को लेकर जांच चल रही है। इसको लेकर मनरेगा उपायुक्त की ओर से दो दिनों पहले ब्लॉक पर जाकर कई पत्रावलियों को खंगाला गया और बीडीओ से पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसको लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों सिर फुटौवल की स्थिति बन गई है और इस गड़बड़ी के लिए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो रोजगार सेवकों की संख्या में हेरफेर कर मानदेय में गोलमाल करने का काम सालों से किया जा रहा है। बताया जाता है कि वर्ष 2016-17 में दुबहड़ बीडीओ की ओर से 39 रोजगार सेवकों के एक साल का कुल छह लाख दो हजार 580 रुपये होना बताते हुए शेष बकाया 10 लाख 92 हजार 630 रुपये की मांग मुख्यालय से की गई। लेकिन हैरानी की बात है कि इसमें 37 रोजगार सेवकों को प्रति रोजगार सेवक 14520 रुपये व दो रोजगार सेवकों को प्रति रोजगार सेवक 32670 रूपए का भुगतान किया गया है। लेकिन बैंक रिकार्ड को मानें बैंक में 34 रोजगार सेवकों को प्रति रोजगार सेवक 14520 रुपये व एक तत्कालीन एपीओ के खाते में एक लाख 30 हजार 18 रुपये की धनराशि भेजी गई। रोजगार सेवकों की सूची में ही तत्कालीन एपीओ को भुगतान करना भी अफसरों के गले की हड्डी बन चुकी है। इसके बाद भी कई गड़बडिय़ां की गई हैं। बताया जाता है कि इसको लेकर कर्मचारियों में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप होने लगा है। सूत्रों की मानें तो दो दिनों पहले इसी बात को लेकर दो कर्मचारी ब्लॉक परिसर में ही भिड़ गए, हालांकि अन्य कर्मचारियों ने मामले को शांत करा दिया।