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फालोअप मनमाने आय प्रमाणपत्र से पात्र हो रहे वंचित

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बलिया। तहसीलों से जारी होने होने वाले आय प्रमाण पत्र को लेकर अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक लापरवाही बरतते हैं। इसके लिए न तो कोई मानक का पालन किया जाता है और न ही अधिकारियों की ओर से इसकी मॉनीटरिंग हो रही। नतीजतन, राजस्व विभाग के कर्मियों की लापरवाही के चलते अन्य योजनाओं के लाभार्थी भी लाभ से वंचित हो रहे। अमर उजाला में गुुरुवार को प्रकाशित एक ही परिवार को तहसील से दो अलग-अलग आय प्रमाणपत्र जारी खबर की जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
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शासन की ओर से छात्रवृत्ति, विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, विकलांग कल्याण पेंशन, दिव्यांग उपकरण वितरण, पिछड़ा वर्ग के ओ लेबल कम्प्यूटर प्रशिक्षण् समेत अन्य योजनाओं में आय प्रमाण पत्र के आधार पर ही लाभार्थियों का चयन किया जाता है। लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी आंखें मूंद कर बिना जांच किए ही मनमानी तरीके से आय प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। छात्रवृत्ति के अलावा पेंशन योजनाओं में आवेदन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 46 हजार व शहरी क्षेत्रों के लिए 48 हजार आय का निर्धारण किया गया है। लेकिन सदर तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से मनमानी तरीके से आय प्रमाण पत्र जारी करने के कारण पात्र होते हुए भी लोग योजना के लाभ से वंचित हो जाते हैं। मनमाने तरीके से आय प्रमाण पत्र जारी करने के मामले की कभी भी अधिकारियों की ओर कोई मॉनीटरिंग नहीं की जाती है जिसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सोहांव गांव के पूजा व अभिषेक का मामला तो केवल उदाहरण भर है अगर सदर तहसील से केवल एक माह के अंदर जारी आय प्रमाण पत्रों की जांच हो जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। सूत्रों की मानें तो कई किसानों को 42 से 48 हजार का आय प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो भूमिहीनों को 50 हजार से एक लाख रुपये वार्षिक आय का प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
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