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नौ वर्षों में नहीं बन सका राजकीय महिला महाविद्यालय

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दुबहर। क्षेत्र में करोड़ों, अरबों रुपए की लागत की विकास योजनाएं जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण दम तोड़ती नजर आ रही हैं। उनकी देखरेख न करने तथा उन पर ध्यान न देने की वजह से इन योजनाओं पर एकदम से विराम लग चुका है, जिसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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ज्ञात हो कि स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शहीद मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवां में कई करोड़ों रुपए की लागत से राजकीय महिला महाविद्यालय का निर्माण 2008 से शुरू हुआ जो आज तक बनकर तैयार नहीं हुआ। न तो अभी तक विद्यालय प्रशासन को हैंडओवर ही किया गया, जिसके चलते विद्यालय की छात्राओं का समुचित तरीके से शिक्षण कार्य नहीं हो पा रहा है। ग्राम पंचायत अखार में पिछले 15 वर्षों से लगभग एक करोड़ 8 लाख रुपए की लागत से न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन अभी तक बनकर तैयार नहीं हुआ है । जिससे इस इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं । साथ ही लगभग पांच सौ करोड़ रुपए की लागत से श्रीरामपुर घाट पर बन रहे पक्का पुल के निर्माण भी कछुए की गति से चलने के कारण यह निर्माण कार्य कब पूरा होगा इसको लेकर भी क्षेत्र के लोगों में काफी चिंता व्याप्त है। इसी तरह जनपद के कई गांव में सरकारी आंगनबाड़ी केंद्रों, बीआरसी पर अतिरिक्त भवन सहित कई सरकारी कार्य आधे अधूरे पड़े हुए हैं, जिनकी देख-रेख तथा पूछने जांचने वाला कोई नहीं है। मजे की बात यह है कि इन आधे अधूरे कार्यों का भुगतान हो चुका है। क्षेत्र के समाजसेवी संस्था जागरूक युवा मंच के लोगों ने अपने जिले के जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि जनहित की योजनाओं को राजनीति से परे होकर सोचने की जरूरत है। उसके समय से निर्माण तथा उपयोगी बनाने की दिशा में पहल करने की आवश्यकता है। नहीं तो पांच वर्ष बाद जनता के बीच में आने पर जनता हिसाब लेने से नहीं चुकती।
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