बलिया। सपा सरकार में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना का संचालन किया गया था, लेकिन इन योजनाओं को संभालना अब मुश्किल हो गया है। अपेक्षा के अनुरुप लाभ नहीं मिलने के कारण संचालक काफी परेशान हैं। कुछ संचालक तो ऋण में अतिरिक्त छूट की उम्मीद भी सरकार से करने लगे हैं।
सपा सरकार ने वर्ष 2015-16 में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर कामधेनु योजना को लागू किया था। इसमें तीन तरह के इकाई लगाने की व्यवस्था की गई थी। कामधेनु इकाई के लिए कुल लागत 121.52 लाख की निर्धारित की गई, जिसमें 100 दुधारू पशु रखने का प्रावधान था। इस इकाई के लिए लाभार्थियों को 25 फीसदी बतौर मार्जिन मनी देने पर बैंक की ओर से शेष 75 फीसदी का ऋण दिया गया। हालांकि सरकार की ओर से पांच साल तक लाभार्थी को अधिकतम 30.82 लाख की धनराशि की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा 50 दुधारु पशुओं की क्षमता का मिनी कामधेनु की लागत 50 लाख तथा 25 दुधारु पशुओं की क्षमता को माइक्रो कामधेनु की लागत 26.99 लाख निर्धारित थी। जिले में कुल छोटी-बड़ी कुल 27 कामधेनु इकाईयां स्थापित की गईं। इसमें कामधेनु की तीन, मिनी कामधेनु की 10 तथा माइक्रो कामधेनु की 14 इकाईयां लगाई गईं। लेकिन अधिकांश इकाईयां पूरी तरह संचालित नहीं हो सकी। हालांकि इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन एक अप्रैल 2017 से बंद हो गया। कुछ माह पहले पशुपालन विभाग की ओर से पड़ताल कर शासन को भेजी गई रिपोर्ट को देखें तो कामधेनु योजना के तहत तीन इकाईयों में से केवल एक इकाई पर पर ही 100 दुधारू पशु मिले और शेष पर 69 तथा 62 दुधारु पशु ही मिले। मिनी कामधेनु के 10 में केवल दो पर 50 दुधारू पशु थे, शेष पर काफी कम थे। माइक्रो कामधेनु के तहत 14 में से केवल चार पर ही 25 दुधारु पशु थे, जबकि कईयों पर चार दुधारू पशु ही थे। इससे साफ है कि यह योजनाएं दिनों-दिम दम तोड़ने लगी हैं।
इनसेट...
कामधेनु योजना से संबंधित अधिकांश इकाईयों पर मानक के अनुरूप दुग्ध उत्पादन नहीं हो पा रहा है। सभी लाभार्थियों को इस बाबत पत्र जारी कर मानक के अनुरूप संचालन करने को कहा गया है। मानक के अनुरुप संचालन नहीं होने पर विभाग की ओर से ब्याज की राशि का भुगतान करना संभव नहीं होगा।
जीसी द्विवेदी
जिला पशु चिकित्साधिकारी