बलिया। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में छमाही परीक्षा नजदीक है लेकिन अभी तक कोर्स पूरे नहीं हो सके हैं। कारण शिक्षा मित्रों की हड़ताल और पाठ्य सामग्रियों का दस फीसदी भी स्कूलों पर नहीं पहुंचना है।
जनपद में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या करीब 2000 है। इनमें करीब डेढ़ लाख बच्चों का दाखिला है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अभिभावकों में परिषदीय विद्यालयों में बेहतर शिक्षा की उम्मीद जगी थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। घोषणाएं तो कई हुईं, लेकिन उनका धरातल पर क्रियान्वयन मात्र 40 फीसदी ही सका। सत्र प्रारंभ होने के प्रथम महीने में ही सरकार ने विद्यालयों में पाठ्य सामग्री बैग, जूता मोजा और संसाधनों से लैस करने का आदेश तो जारी कर दिया था लेकिन अभी तक जनपद के विद्यालयों में बच्चों को पाठ्य सामग्रियां नहीं मिल सकी हैं। जिससे अध्यापक और बच्चों के सामने भी पाठ्यक्रम पूरा करने में गतिरोध बना हुआ है। दूसरी तरफ शिक्षामित्रों के धरना प्रदर्शन से करीब एक माह तक विद्यालयों में पढ़ाई बाधित रही। अब भी कई विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुुमार राय ने बताया कि विद्यालयों में बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षकों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, उन्हें सख्त चेतावनी भी दी गई है। शिक्षामित्रों के हड़ताल पर जाने की वजह से कुछ पढ़ाई बाधित हुई, लेकिन परीक्षा से पूर्व पाठ्यक्रम पूरा करा लिया जाएगा।