बलिया। उप्र माध्यमिक शिक्षणेतर एसोसिएशन के प्रांतीय आह्वान पर अर्ह शिक्षणेतर कर्मचारियों को शिक्षक पदों पर पदोन्नति देने, राज्य कर्मचारियों की भांति शिक्षणेतर कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर अवकाश, नकदीकरण, पुरानी पेंशन बहाल करने, लिपिक संवर्ग का त्रिस्तरीय ढांचा का पुनर्गठन, लिपिकों तथा परिचारकों की नियुक्तियों पर लगी रोक हटाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष मुजतबा हुसेन ने कहा कि विद्यालयों में आउट सोर्सिंग समाप्त कर वित्तविहीन विद्यालयों की शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनाने तथा मानदेय स्वीकृति करने की मांगों को लेकर जनपदीय शिक्षणेतर कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर डीआईओएस कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन भी सौंपा गया। कहा कि शासन की अनदेखी के कारण ही शिक्षणेतर कर्मचारी सतत संघर्षशील हैं। कहा कि संवेदनशील सरकारों की जिम्मेदारी होती है कि जनसमस्याओं का निराकरण करे। जबकि ऐसा नहीं हो रहा है।
जिलाध्यक्ष श्यामसुंदर उपाध्याय ने कहा कि पिछली सरकारों ने शिक्षणेतर कर्मचारियों की बातें नहीं सुनी तो उन्हें बदलना पड़ा। इस सरकार से भी बहुत आशाएं थी क्योंकि यह सरकार नैतिकता की दुहाई दे रही थी। लेकिन शिक्षणेतर कर्मचारी आज भी दुखी है। हम लोगों ने आरपार की लड़ाई का निर्णय लिया है। इस मौके पर राष्ट्रीय संरक्षक लल्लन सिंह, गुप्तेश्वर पाठक, शशिभूषण उपाध्याय, रामदुलार राय, सुजीत सिंह, प्रनीत श्रीवास्तव, पंकज गुप्ता, नरेंद्र यादव, तारकेश्वर प्रसाद, शैलेश सिंह, अटल तिवारी आदि मौजूद रहे। संचालन संजय कुमार सिंह ने किया।