बलिया। बोर्ड परीक्षा में कई केंद्र कक्ष निरीक्षकों की कमी से जूझ रहे है। कारण, विद्यालयों ने कक्ष निरीक्षक की ड्यूूटी में लगाए गए शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया है। जिससे केंद्र पर अव्यवस्थाएं पैदा हो रही हैं जबकि केंद्र व्यवस्थापक इसे लेकर परेशान हैं। उधर, डीआईओएस ने ऐसे विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति करने की चेतावनी दी है। जनपद में हाईस्कूल व इंटर की बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 274 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा को सही तरीके से संचालित करने के लिए कुल 8020 कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता बताते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से प्लान बनाया गया। इसमें बेसिक शिक्षा विभाग से 1580 शिक्षकों के अलावा वित्तविहीन स्कूलों के अध्यापकों को कक्ष निरीक्षक बनाते हुए उन्हें निर्धारित केंद्र पर पहुंचने को कहा गया। लेकिन बोर्ड परीक्षा के तीन दिन बीत जाने के बाद भी दर्जनों केंद्रों पर कक्ष निरीक्षकों की कमी रही। जबकि कई कक्ष निरीक्षकों ने इस कार्य में दिलचस्पी नहीं ली। इतना ही नहीं बेसिक शिक्षा विभाग की चार महिला अध्यापकों ने तो ड्यूटी पत्र ही लेने से इंकार कर दिया। मामले में बीएसए की ओर से कार्रवाई की गई। आलम यह है कि कई केंद्रों पर कक्ष निरीक्षकों का कार्य स्कूल के परिचारक से कराना पड़ रहा है। हालांकि दो दिनों की परीक्षा के बाद विभाग जरुर जागा है और डीआईओएस ने सभी प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर बोर्ड परीक्षा में तैनात शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि प्रधानाचार्यों की ओर से बोर्ड परीक्षा में तैनात कक्ष निरीक्षकों को कार्यमुक्त नहीं करने की दशा में संबंधित विद्यालयों को चिह्नित करते हुए परीक्षा कार्य में बाधा मानते हुए उनके मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति माध्यमिक शिक्षा परिषद को कर दी जाएगी। लेकिन इसके बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो सका है। व्यवस्थापक परेशान हाल हैं कि आखिर वह कक्ष निरीक्षक कहां से लाएं। अमर नाथ राय, जिला विद्यालय निरीक्षक ने कहा कि कई परीक्षा केंद्रों से कक्ष निरीक्षकों की कमी सूचना प्राप्त हो रही है और कई विद्यालयों से परीक्षा ड्यूटी में लगे शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं करने की भी जानकारी मिल रही है। शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं करने वाले विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति की जाएगी।