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सिर्फ मुरली छपरा ब्लाक में ही कुपोषित बच्चों की संख्या 3933

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तीन विभागों को कुपोषण दूर करने की जिम्मेदारी है। फिर भी विकास खंड मुरली छपरा में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या हजारो में है। सरकार भले ही कितनी योजनाएं चलाए पर धरातल पर नहीं उतरने के कारण बच्चों का कुपोषण होने पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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बच्चों को कुपोषणमुक्त करने के लिए सरकार कई योजनाएं चलाई हैं, लेकिन योजनाओ को पूर्ण रूप से धरातल पर नहीं उतरने के कारण कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं लाई जा रही। इसकी बानगी विकास खंड मुरलीछपरा में कुपोषित बच्चों के आंकड़ो से मिल जाता है। इस विकास खण्ड में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 3933 है। बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय ली गई। आंकड़े के अनुसार केवल विकास खंड मुरली छपरा में केवल कुपोषित बच्चों की संख्या 2797 है। साथ ही अति कुपोषित बच्चों की संख्या 1136 है। ग्राम पंचायत, स्वास्थ्य विभाग और बाल पुष्टाहार विभाग जैसे तीन विभागों को कुपोषण दूर करने की जिम्मेदारी है। फिर भी कुपोषण दूर होने का नाम नहीं ले रहा। लोगों के अनुसार योजनाओं की कमी नहीं पर धरातल पर नहीं के बराबर है। इस कारण इसमें कमी नहीं जा रहा। इस विकास खंड में हालत यह है कि जिले के मुख्य विकास अधिकारी द्वारा पिछले सालो में गोद लिए गांव बहुआरा और भोजापुर है। केवल बहुआरा में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 145 है और भोजापुर में 60 अति कुपोषित बच्चे हैं। वहीं पिछले सालों में गोद लिए बीडीओ मुरली छपरा के गोद लिए गांव राम पुर कोड़हरा में 24 तो सूर्यभानपुर में 102 अति कुपोषित वच्चे हैं। सरकार कुपोषण दूर करने के लिए ग्राम पंचायत को स्वच्छता की जिम्मेदारी दी है तो बाल पुष्टाहार विभाग के माध्यम से हौसला पोषण योजना भी चलाई है और स्वास्थ्य विभाग की भी बच्चे के गर्भ में से निगरानी की जिम्मेदारी है। फिर भी इतने मात्रा में अति कुपोषित बच्चों को मिलना इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रश्न चिह्न जरूर खड़ा करता है।
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