जयप्रकाश नगर। इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगावा) में फिर घाघरा ने करीब एक सप्ताह से अपना तांडव दिखाना शुरू कर दिया है। जिसमें अठगावा के किसानों की कृषि योग्य भूमि अपने आगोश में प्रतिदिन लेती जा रही है। पूर्व की तरह शासन-प्रशासन व राजनीतिक लोग प्रतिदिन सर्वे व निरीक्षण करने में मशगूल है। लेकिन स्थाई निदान के बारे में कोई कुछ नहीं करता।
मालूम हो कि इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगावा) में वर्ष 2010-11 में कटान की विनाश लीला शुरू हुई थी, लेकिन वी थमने का नाम नहीं ले रही है। शासन-प्रशासन भी इसके प्रति संजिदा नहीं दिख रहा है। गत एक पखवाड़े में करीब 50 मीटर कृषि योग्य भूमि घाघरा ने अपने जद में ले लिया। आलम यह है कि कटान प्रतिदिन बकुलहा संसार टोला बंधे की तरफ बढ़ रहा। इब्राहिमाबाद नौबरार ग्राम पंचायत भगौलिक तौर पर उत्तर प्रदेश की सीमा में है। वही सिताब दियरा व प्रभुनाथ नगर ग्राम पंचायत बिहार क्षेत्र के सीमा में बसा हुआ है। घाघरा के कटान से यूपी व बिहार की सीमा से लगे तीनों पंचायत समान रूप से प्रभावित हुए हैं। इस मामले में बिहार सरकार कई प्रोजेक्ट के माध्यम से कटान को रोकने के प्रति संजिदा है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार आज भी उदासीन बनी हुई है। प्रदेश सरकार केवल सर्वे करने के शिवाय कुछ नहीं कर सकी। वर्ष 2012-13 में बिहार सरकार ने करीब 18 करोड़ की लागत से जीओ बैग व रिवेटमेंट विधि से कटान रोधी कार्य शुरू किया था। जिससे कटान पर लगाम कसते हुए अपने पंचायत के लोगों को बचा लिया। वही प्रदेश के सीमा में अठगावा के किसानों की करीब एक हजार एकड़ भूमि को घाघरा ने अपने आगोश में लेने के बाद अठगावा के तीन पुरवों (नौका टोला, छक्कू टोला, बड़का सुफल टोला )के करीब 350 परिवारों को विस्थापित कर दिया। इसके बाद कटान पीड़ितों ने वर्ष 2014 में धरना-प्रदर्शन, एनएच जाम व आमरण अनशन किया था। जिसके बाद तत्कालीन प्रदेश सरकार ने 17 करोड़ एक लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। लेकिन बाढ़ विभाग धन और समय रहते आज तक कटानरोधी कार्य नहीं करवा सका। बल्कि उस धन को बंदरबांट करने में लगे रहे। जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगतते हैं। ग्रामीणों ने एक बार फिर जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कट रही भूमि सहित बंधे को बचाने की मांग की है।