बलिया। जनपद में मनरेगा लागू होने के 11 साल बाद भी जॉब कार्डधारकों को काम देने में मनमानी जारी है। मस्टर रोल को सचिव अपने कब्जे में रखते हैं और मनमानी करते हैं जबकि मस्टर रोल रोजगार सेवकों को प्राप्त कराने का प्रावधान है। इसके चलते मनरेगा कार्य पटरी पर नहीं आ रहा है।
वर्ष 2007-08 में गांवों में मनरेगा कार्य के लिए मजदूरों को जॉब कार्ड उपलब्ध कराए गए और कार्यस्थल पर काम कराने के लिए संविदा पर रोजगार सेवकों की तैनाती की गई। लेकिन 11 साल पूरा होने के बाद भी जिले में मनरेगा पटरी पर नहीं है। इस योजना को लेकर अधिकारियों की उदासीनता बदस्तूर जारी है और मनमानी के कारण जॉब कार्डधारकों को काम भी नहीं मिल पाता है। हालांकि अधिकांश जॉब कार्डधारकों को मनरेगा नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण वह आवेदन देकर काम नहीं मांगते।
मनरेगा नियमों के तहत रोजगार सेवकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह कार्य के सापेक्ष जारी मस्टर रोल को संबंधित ब्लॉक से प्राप्त कर जॉब कार्डधारकों से कार्य कराएं और कार्यस्थल पर वह मौजूद रहकर जॉब कार्डधारकों की हाजिरी भी सुनिश्चित करेंगे। लेकिन 11 साल बाद भी यह व्यवस्था पटरी पर नहीं है। बताया जाता है कि गांवों में मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्य के लिए मस्टर रोल तो जारी किए जाते हैं लेकिन इसे रोजगार सेवकों को न देकर सचिव ही लेकर अपने हिसाब से काम कराते हैं। इसको लेकर कई बार रोजगार सेवक संगठनों की ओर से अधिकारियों से गुहार भी लगाई गई लेकिन आज भी स्थिति ज्यों की त्यों है।