बलिया। जिला अस्पताल में इन दिनों आवश्यक सुई-दवाओं का टोटा चल रहा है। कारण कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय द्वारा बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी सरकार द्वारा नियुक्त कंपनी अच्छी गुणवत्ता वाली सुई-दवा जिला अस्पताल में नहीं भेज रही है। जिससे मरीजों एवं उनके तीमारदारों को मजबूर होकर बाहर की महंगी सुई-दवा खरीदनी पड़ रही है। इससे मरीजों एवं उनके तीमारदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। वहीं मेडिकल दूकानदारों की चांदी कट रही है। जबकि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता भी लोगों के समझ से परे है।
प्रदेश सरकार आमजन को स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए कटिबद्ध है। इसके लिए कई योजनाएं भी संचालित की है। यहां तक कि चिकित्सकों को बाहर की सुई-दवा न लिखने की हिदायत तक दी है। लेकिन धरातल पर सच्चाई दूर-दूर तक दिखता नजर नहीं आ रहा है। कारण कि जिला अस्पताल में आवश्यक सुई-दवा तक उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल में ऐसी सुई-दवा उपलब्ध है, जिसके सेवन से मरीज एक घंटे तो दूर एक सप्ताह में भी ठीक नहीं हो सकता है। बावजूद जनपद के मंत्री, विधायक व सांसद सरकार की उपलब्धियां गिनवाने से नहीं थक रहे है। अगर ये जनप्रतिनिधि हवा में बात करने के बजाय धरातल पर कुछ करने की सोचते तो शायद जिला अस्पताल की स्थिति कुछ और होती और मरीजों एवं उनके तीमारदारों को बाहर से सुई-दवा नहीं खरीदनी पड़ती। वहीं जिला अस्पताल में अच्छी सुई-दवाएं उपलब्ध होती। लेकिन अच्छी सुई-दवा के लिए जिले का कोई भी जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं दिख रहा है। जिसके कारण जिला अस्पताल का सुई-दवा लेना कोई उचित नहीं समझ रहा है। हालंाकि जिला अस्पताल महकमा ने संबंधित कंपनी को कई बार सुई-दवा के लिए रिमाइंडर किया है। बावजूद आवश्यक सुई-दवाईयां नहीं भेजा जा रहा है।
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सरकार द्वारा सुई-दवा की गुणवत्ता जांच कर जिस कंपनी की दी जाती है। वह सभी सुई-दवा जिला अस्पताल में उपलब्ध है, उसे मरीजों में वितरित किया जाता है। गुणवत्ता के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते है। कारण कि वह सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
डा. शिव प्रसाद, सीएमएस ।