गलती विभाग की, सजा भोग रही जनता
बिजली कनेक्शन होने के बाद भी उपभोक्ताओं को पांच साल बाद भी बिल नहीं मिला है, इस वजह से कनेक्शनधारी उहापोह की स्थिति में है कि उनका कनेक्शन वैध है या अवैध। विभाग से डाटा मांगने पर कर्मचारी आनाकानी कर रहे हैं। जिससे लोगों में नाराजगी भी है।
सूबे कीसरकार द्वारा पूरे प्रदेश में बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए तमाम प्रकार के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। सूबे के मुखिया द्वारा ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को जनपद का प्रभारीमंत्री नियुक्त किया है। लेकिन यूपीपीसीएल में आज भी तमाम अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। विभागीय कर्मचारियों की कमी के चलते लोगों को आनन-फानन में बिजली का कनेक्शन तो दे दिया गया, लेकिन उसे कंप्यूटर में पांच साल तक नहीं भेजा गया। लिहाजा उपभोक्ता अपने विद्युत बिल के लिए विद्युत विभाग का चक्कर काटने को विवश है। बार-बार बिल निकालने के लिए उपभोक्ता अधिकारियों के यहां पत्रक भी देते हैं। बावजूद इसके बिल उपभोक्ता को नहीं मिल पाता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अब यह डर सताने लगा है कि एक साथ इतना बड़े बिल की रकम कैसे चुकता करेंगे। जबकि विभाग के कर्मचारी एक मुश्त समाधान योजना का लालीपाप देकर उपभोक्ताओं को ठगते नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि गलती विभागीय अधिकारी-कर्मचारी कर रहे हैं और सजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। यहीं नहीं चेकिंग के नाम पर भी विभागीय अधिकारी लोगों से अवैध वसूली कर रहे है। वहीं फर्जी तरीके से कनेक्शन देकर कर्मचारी अपने पाकेटभी गर्म करते है।
1-कर्णछपरा निवासी हरिद्वार सिंह का कहना है कि 23 अक्तूबर 2013 को हमने बिजली विभाग से कनेक्शन लिया था। लगभग पांच साल बीत जाने के बाद भी अब तक बिजली का बिल नहीं मिला। जबकि इसकी शिकायत कई बार उच्चाधिकारियाें से की गई। बावजूद अब तक बिजली का बिल नहीं मिल सका।
2- इब्राहिमाबाद निवासी ब्रजेश सिंह का कहना है कि हमने वर्ष 2015 में विद्युत कनेक्शन लिए थे। लेकिन अब तक विद्युत बिल नहीं मिला। हमें कई दिनों से हम प्रतिदिन विद्युत विभाग का चक्कर काट रहे है। बावजूद बिजली का बिल नहीं मिल रहा है ताकि हम अपना बिल जमा कर सकें। एक बार जिला मुख्यालय आने में सौ से डेढ़ सौ रुपये तक खर्च होता है।
3- टघरौली निवासी हृदयानंद यादव का कहना है कि सरकार के दबाव के बाद अधिकारी कनेक्शन लेने के लिए लोगों पर दबाव बनाते हैं। लेकिन कनेक्शन लेने के बाद विद्युत बिल नहीं भेजते हैं। ऐसे में परेशान उपभोक्ता घर से लेकर कार्यालय तक का महीनों चक्कर लगाते हैं।
4- इब्राहिमाबाद निवासी श्रीराम ने बताया कि विद्युत बिल के कर्मचारियों से मांग करने पर कंप्यूटर में लोड करने के लिए एक से दो हजार रुपये की मांग करते है। सबकुछ जानने के बाद विभागीय अधिकारी चेकिंग के नाम पर आम जनता का शोषण कर रहे हैं।
जिन उपभोक्ताओं का विद्युत बिल पांच साल से बकाया है। उनका बिल किसी कारण से नहीं भेजा रहा है। उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा। सभी क्षेत्रों के एसडीओ को निर्देश दिया गया है कि बिल निकालने में किसी प्रकार की हीलाहवाली न करें। यदि ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित एसडीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
= एके मिश्र, अधीक्षण अभियंता, बलिया