पंचायती राज विभाग के लिए नमामि गंगे योजना का लक्ष्य पूरा करना आसान नहीं है। इसके लिए विभाग को 14 दिनों में 12 हजार शौचालय बनवाने होंगे जो काफी मुश्किल भरा काम होगा। योजना के तहत गंगा किनारे के 41 गांव चयनित हैं।
वर्ष 2015-16 में पूर्व से संचालित संपूर्ण स्वच्छता अभियान के स्थान पर भारत सरकार की ओर से नमामि गंगे योजना की शुरुआत की गई। योजना के पहले चरण में गंगा किनारे के गांवों को शौचालय से संतृप्त करने का प्रावधान किया गया। हालांकि इस योजना ने वर्ष 2016-17 में मूर्तरुप लिया। पंचायती राज विभाग की ओर से गंगा किनारे के पांच ब्लाकों सोहांव, दुबहड़, बेलहरी, मुरलीछपरा व बैरिया के कुल 41 गांवों का चयन कर कुल 29 हजार शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया। बताया जाता है कि भारत सरकार ने पूर्व से निर्धारित शौचालय निर्माण की धनराशि भी 10 हजार से बढ़ाकर 12 हजार कर दिया।
लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण अब तक कुल 17 हजार शौचालयों का ही निर्माण हो सका। इसी बीच चार जनवरी से चुनावी प्रक्रिया शुुरु हो जाने के कारण गांवों में नए निर्माण पर रोक लग गई। अब चुनाव के समाप्त होने के बाद लक्ष्य पूरा करने की चुनौती सामने है। अधिकारियों की ओर से 12 हजार शौचालयों के निर्माण के लिए 31 मार्च तक कराने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि नमामि गंगे योजना के तहत गंगा किनारे के गांवों को शौचालय से संतृप्त करते हुए ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) करने का भी प्रावधान है। लेकिन इस काम में पंचायत राज विभाग काफी पीछे है। डीपीआरओ की मानें तो अब तक गंगा किनारे के पांच ब्लाकों के 18 गावों को ओडीएफ कराया जा चुका है और अन्य गांवों में इसको लेकर प्रयास किए जा रहे हैं।