बलिया। जिला अस्पताल की बिजली व्यवस्था एक बार बेपटरी हो गई। पावर स्टेशन से जिला अस्पताल उपकेंद्र को आने वाली 11 हजार केवी के केबल में फाॅल्ट आने से बुधवार की सुबह करीब 11 बजे बिजली आपूर्ति बाधित रही। 13 दिन में दूसरी बार फाॅल्ट आया।
बिजली गुल होने से ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड, सीटी स्कैन, एक्स-रे और डायलिसिस जैसी सेवाएं प्रभावित हुईं। सीटी स्कैन, डायलिसिस और एक्स-रे कराने पहुंचे कई मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ा, जबकि अधिकतर मरीजों को वापस लौटना पड़ा। इमरजेंसी व वार्डों में जनरेटर के सहारे पंखा व लाइट की सप्लाई से भर्ती मरीजों को राहत रही। पर्ची काउंटर कुछ देर के लिए ठप रहा। अचानक लाइट कटने से पैथोलॉजी में कुछ देर के लिए टाॅर्च के रोशनी में खून निकाला गया। करीब एक घंटे बाद शहर की सप्लाई से जोड़कर अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था चालू की गई। लेकिन कम वोल्टेज के कारण पंखा धीमे-धीमे चल रहा है।
जिला अस्पताल में बिजली फाॅल्ट और ओवरलोड की समस्या नई नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार परिसर में बने चिकित्सकों और कर्मचारियों के आवासों में एसी समेत अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक इस्तेमाल होने से लोड बढ़ता है। इसका असर अस्पताल की मुख्य विद्युत व्यवस्था पर पड़ता है। ओवरलोड के कारण मुख्य केबल में बार-बार फाॅल्ट आने और जलने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
बिजली कटने से इमरजेंसी से लेकर पैथोलॉजी, ओपीडी और वार्डों तक मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इमरजेंसी में बिजली जाते ही पंखे और एसी बंद हो गए, जबकि इनवर्टर से केवल लाइट जलती रही। उमस भरी गर्मी में मरीज और तीमारदार परेशान रहे। करीब दो घंटे बाद शहर की आपूर्ति बहाल होने पर राहत मिली। लेकिन शाम को कटौती के कारण परिसर अंधेरे रहा।
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केस 01:
10 सितंबर करे ओवरब्रिज पर 11 हजार केवी के केबल में फाॅल्ट आने के कारण पांच घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही। इमरजेंसी व्यवस्था जनरेटर पर संचालन हुआ, बाद में शहर की लाइन से अस्पताल को जोड़ा गया। इसके बाद आपूर्ति की व्यवस्था पटरी पर लौटी।
केस-02 :
18 जून को गर्मी और ओवरलोडिंग के कारण जिला अस्पताल के केबल में अचानक आग लग गई। बिजली आपूर्ति चालू रहने के दौरान केबल में आग लगने से कई बार विस्फोट जैसी तेज आवाजें भी सुनाई दीं। इसके कारण जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति करीब चार घंटे तक प्रभावित रही।
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केस-03 :
20 जून को ओवरलोडिंग के कारण केबल जलने से जिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति करीब चार घंटे तक बाधित रही। इस दौरान इमरजेंसी, मेडिकल, हड्डी, सर्जिकल वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करीब 105 मरीज गर्मी से बेहाल रहे। जुलाई 2025 में करीब 45 मिनट तक इमरजेंसी में अंधेरा रहा।
केस-04 : अगस्त में इमरजेंसी के पास बिजली का तार टूटने से जिला अस्पताल की आपूर्ति करीब छह घंटे तक बाधित रही। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी में अतिरिक्त इन्वर्टर लगाने की बात कही। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर सीटी स्कैन, एक्स-रे और डायलिसिस जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ जाती है।
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इमरजेंसी
इमरजेंसी से सटे एडीआरएफ वार्ड में करीब 16 गंभीर मरीज भर्ती थे। इनमें पांच मरीजों को ऑक्सीजन लगी थी। अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट में दो बड़े सिलेंडर व जनरेटर होने के कारण ऑक्सीजन की आपूर्ति चलती रही। हालांकि बिजली कटौती के दौरान वार्ड में पंखे और एसी बंद रहने से मरीजों को गर्मी और उमस झेलनी पड़ी।
पैथोलॉजी
पैथोलॉजी कक्ष में बिजली कटने के समय 30 से ज्यादा मरीज खून का सैंपल देने के लिए कतार में खड़े थे। पांच मरीजों के सैंपल लिए जा रहे थे, तभी अचानक बिजली गुल हो गई और कक्ष में अंधेरा छा गया। इसके बाद तीमारदारों ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर कर्मचारियों की मदद की, जिसके बाद सैंपल लेने का काम जारी रखा गया।
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बच्चा वार्ड
बच्चा वार्ड में छह-सात मरीज भर्ती थे। बिजली कटने के बाद पंखे बंद होने से उमस भरी गर्मी में बच्चे और उनके तीमारदार परेशान रहे। बिजली आने के बाद ही उन्हें राहत मिली। बिजली नहीं रहने से नर्सों को उपचार में दिक्कत हुई। दवाइयों के लिए भी परेशान होना पड़ा।
ओपीडी में रहे 1500 से ज्यादा मरीज
ओपीडी में भी बिजली कटौती का असर दिखाई दिया। कमरों में अंधेरा होने पर चिकित्सकों ने दरवाजे से आ रही रोशनी में मरीजों को देखा। उमस और गर्मी के बीच तीन चिकित्सक करीब 20 से 30 मिनट के लिए ओपीडी से बाहर चले गए। दोपहर तक मरीजों की भीड़ के बीच इलाज प्रभावित रहा।
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परिसर में रहा अंधेरा
शाम करीब साढ़े छह बजे बिना पूर्व सूचना बिजली कटने से अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया। सुरक्षाकर्मी टॉर्च के सहारे परिसर में भ्रमण करते रहे। अचानक अंधेरा होने से मरीजों और तीमारदारों में भी असुरक्षा का माहौल बना रहा।
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मरीजों ने बताया
बहेरी निवासी मुस्तफा ने बताया कि बिजली नहीं होने से सीटी स्कैन जांच कराने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। कई मरीज बिना जांच कराए ही घर लौट गए। सुखपुरा निवासी पंकज कुमार ने कहा कि पैथोलॉजी में बिजली कटने से अंधेरा छा गया, कई मरीजों का टॉर्च की रोशनी में खून का सैंपल निकाला गया। मिड्ढा गांव निवासी दिनबंधु ने बताया कि जांच के लिए मां के खून का सैंपल लिया जा रहा था। इसी दौरान अचानक लाइट कटने से टाॅर्च की रोशनी में सैंपल लिया गया। बिजली के अभाव में जनरेटर चालू कर डायलिसिस की गई।
11 हजार केवी के मुख्य केबल में फाॅल्ट आने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। जनरेटर से इमरजेंसी के लिए आपूर्ति चालू रखी गई। शहर की लाइन से अस्पताल को जोड़ा गया है। इमरजेंसी सेवा जनरेटर से की जा रही है। ऑक्सीजन के लिए बैकअप रहता है। इससे परेशानी नहीं हुई। -डॉक्टर संतोष चौधरी, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल, बलिया।