सुखपुरा। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में मंगलवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ सतत व्याख्यानमाला का उद्घाटन भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. रजनीश कुमार शुक्ला ने किया। इस मौके पर गोष्ठी में समकालीन विश्व की चुनौतियां और मानव एकात्मवाद पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ता डॉ. रजनीश शुक्ला ने कहा कि हम प्रश्नों का उत्तर दूर के किताबों व व्यक्तियों में खोजना चाहते हैं। जबकि बलिया की मिट्टी में ही हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।
इस देश के गरीब, किसान, मजदूर के बारे में सोचते थे, उन चंद्रशेखर में पूरा भारत दिखता था। उन्होंने भौतिक वादी राजधानी दिल्ली से नहीं बल्कि गांव के कुटिया से संचालित होने वाले देश की कल्पना की थी। जिसमें संपूर्ण भारत बसता था। कहा कि गांव व घर संस्कार युक्त होगा तो देश विकसित होगा। कहा कि पं. दीनदयाल का सपना था अंतिम व्यक्ति का विकास होगा तभी सम्पूर्ण समाज व देश का विकास होगा। पं. दीनदयाल जी ने दरीद्रनरायण को ही अपना आराध्य देव माना। कहा कि आज दुनिया भौतिकवादी युग में अपने सुख को खोज रही है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सोने की लंका को एक बंदर ने जला दिया। लेकिन भारतीय संस्कृति की मूल्यों पर आधारित समाज जिसमें महारानी से लेकर एक धोबी तक को भी एक नजरिया से देखा जाता है। यह मानव एकात्मवाद है। इसके पूर्व कुलपति योगेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्रम व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. अवनीश चन्द्र पांडेय, डॉ. जैनेंद्र पांडेय, भाजपा गोरक्ष प्रांत के महामंत्री देवेंद्र यादव, अरविंद उपाध्याय उपस्थित रहे।अध्यक्षता कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह व संचालन राजीव कुमार ने किया।