बलिया (रामगढ़)। गंगा की उफनती लहरों ने बुधवार की दोपहर में दुबे छपरा रिंग बंधा का 50 मीटर हिस्सा काट कर अपने में समाहित कर लिया। बंधा कटने से आसपास के गांवों की तीस हजार की आबादी पर संकट मंडराने लगा है। पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली ने मौके पर पहुंच कर हालात का जायजा लिया। सीओ बैरिया उमेश कुमार ने उदई छपरा, गोपालपुर, दुबे छपरा के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए एलर्ट जारी कर दिया है। जबकि बंधा को बचाने के लिए बाढ़ विभाग ने हरे पेड़ों को काटकर बाड़ बनवा दिया।
वर्ष 2016 में आई बाढ़ ने दुबे छपरा रिंग बंधे को तोड़ दिया था। इसके बाद बाढ़ विभाग ने 29 करोड़ रुपये से बंधे का चौड़ीकरण कर करीब दो किलोमीटर दूरी तक जिओ बैग से प्लेटफॉर्म बनाया और तीनों गांवों को सुरक्षित करने का दावा किया था। हालांकि बांध के निर्माण को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। आलम यह रहा कि जैसे ही गंगा ने मंगलवार को सामान्य बाढ़ स्तर पार किया दुबेछपरा रिंग बंधा पर दबाव बढ़ने लगा और बुधवार की दोपहर में बंधा का आधा हिस्सा करीब 50 मीटर लंबा बना प्लेटफॉर्म गंगा में विलीन हो गया।
सूचना पर पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। इसकी जानकारी जब बाढ़ विभाग के अधिकारियों को हुई तो आनन-फानन में बाढ़ विभाग के एसडीओ चंद्रमोहन शाही समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए और ग्रामीणों के साथ बंधे के कटान को रोकने के लिए हांफते रहे। हरे पेड़ों का काटकर बंधे को बचाने के लिए बाड़ तैयार किया। लेकिन ग्रामीणों की मानें तो बंधा के निर्माण में मानक की अनदेखी की गई है और गंगा के जलस्तर में थोड़ा भी बढ़ाव हुआ तो बंधा का बचना मुश्किल है। बंधा के हिस्सा बहने के बाद एनडीआरएफ की टीम को भी तैनात कर दिया गया है। क्षेत्राधिकारी की ओर से लाउडस्पीकर से ग्रामीणों को हाई अलर्ट करते हुए सुरक्षित स्थानों पर जाने की घोषणा की गई है। मौके पर एसडीएम बैरिया लाल बाबू दुबे, तहसीलदार गुलाब चंद्रा, एनडीआरफ के इंस्पेक्टर अनिल शर्मा व बाढ़ विभाग के अधिकारी मौजूद हैं।