बलिया। बोर्ड परीक्षा के चार दिन बीत जाने के बाद भी कई केंद्रों परीक्षार्थियों के बैठने का इंतजाम तक नहीं हो सका है और अधिकारी निर्देश देकर कोरम पूरा कर रहे हैं। इससे केंद्र बनाने के दौरान किए गए सत्यापन पर सवाल उठने लगे हैं।
महीनों पहले से ही नकलविहीन परीक्षा कराने को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद से लेकर जिले स्तर तक कवायद की गई। इसके बावजूद शिक्षा माफिया प्रशासन व शिक्षा विभाग पर भारी पड़े और गलत सूचना के आधार पर विद्यालयों को केंद्र बनवाने में सफल रहे। इसका खुलासा परीक्षा के दौरान सामने आ रही एक-एक कमियों से हो रही है। हैरानी की बात है कि केंद्र निर्धारण के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से स्कूलों से ऑनलाइन ब्योरा मांगा गया। इसमें सीसीटीवी कैमरा, मार्ग की स्थिति, कमरों की संख्या, फर्नीचर की संख्या, नजदीकी स्कूल का नाम व दूरी आदि अंकित करना शामिल था। आलम यह रहा कि अधिकांश स्कूलों ने गलत डाटा फीड़ किया। इसके बाद परिषद की ओर से शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूलों की ओर से अंकित ब्योरे का सत्यापन कर रिपोर्ट मांगा। बताया जाता है कि इसमें नकलमाफिया भारी पड़े और सत्यापन रिपोर्ट समय से नहीं भेजे जाने के कारण परिषद ने ऑनलाइन ब्योरा के आधार पर केंद्रों का निर्धारण कर दिया। हालांकि परिषद ने डिबार स्कूलों का नाम जारी करते हुए एक बार फिर सत्यापन केंद्रों को दुरुस्त करने को कहा। लेकिन इस बार भी व्वही खेल हुआ जो अब परीक्षा के दौरान सामने आ रहा है। स्थिति यह है कि कहीं सभी कमरों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं तो कई केंद्रों पर फर्नीचर के अभाव में परीक्षार्थी फर्श पर बैठ कर परीक्षा देने को विवश हैं। शुक्रवार को बांसडीह के मजिस्ट्रेट ने बताया शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया कि गायघाट स्थित एक सेंटर पर छह कमरों में फर्नीचर के अभाव में परीक्षार्थी फर्श पर बैठ कर परीक्षा दे रहे हैं। इन्हें फर्नीचर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
डीआईओएस की ओर से यह मजिस्ट्रेट को यह निर्देश दिया गया कि दो दिनों के अंदर अगर फर्नीचर का इंतजाम नहीं किया जाता है तो इस स्कूल को आजीवन डिबार करने की संस्तुति कर जाए। सवाल उठता है कि अब निर्देश क्यों दिया जा रहा क्या केंद्र बनाने के पहले निर्देश नहीं दिए गए? केंद्र निर्धारण के दौरान व केंद्र निर्धारण के बाद सत्यापन में यह कमी क्यों नहीं दिखी? परीक्षा के चार दिन बाद निर्देश देकर शिक्षा माफियाओं को मौका नहीं दिया जा रहा? चार दिनों तक फर्श पर बैठाकर परीक्षा कराने वाले स्कूल के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? परीक्षा के चार दिन बाद इस दुर्व्यवस्था पर मजिस्ट्रेट की निगाह क्यों पड़ी और पहले तीन किसी ने क्यों नहीं देखा?
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केंद्र निर्धारण के बाद संबंधित सभी स्कूलों को सभी तरह के इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे। अब जहां से भी व्यवस्था में कमी होने की सूचना मिल रही है वहां कार्रवाई की जा रही है।
= एएन राय
डीआईओएस, बलिया