बलिया। जीएसटी सिस्टम के तहत ट्रांसपोर्टर के लिए ई-वे बिल एक फरवरी से ही प्रभावी है, इस व्यवस्था के तहत ट्रांसपोर्टर को 50 हजार से अधिक मूल्य के माल की आवाजाही के लिए ई वे बिल साथ रखना होगा। नौ फरवरी के बाद रियायत की अवधि अब खत्म हो चुकी है। शनिवार से बिना ई वे बिल लेकर चलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सहायक आयुक्त वाणिज्यकर जयंत सिंह ने बताया कि ई वे बिल के अंतर्गत विक्रेता (वस्तु के बेचने वाला) को जानकारी देनी होगी की वो किस वस्तु को बेच रहा है, वहीं खरीदने वाले व्यक्ति को जीएसटीन पोर्टल पर जानकारी देनी होगी कि उसने या तो गुड्स को खरीद लिया है या फिर उसे रिजेक्ट कर दिया है। मान लीजिए अगर किसी एक ट्रक में कई कंपनियों का सामान जा रहा है तो ट्रांसपोर्टर को एक कंसालिडेटेड बिल बनाना होगा। इस बिल के अंदर सारी कंपनियों के सामान की अलग अलग डिटेल होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि ई-वे बिल में सप्लायर, ट्रांसपोर्ट और ग्राही की डिटेल दी जाती है। अगर जिस गुड्स का मूवमेंट एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर एक ही राज्य के भीतर हो रहा है और उसकी कीमत 50,000 रुपए से ज्यादा है तो आपूर्तिकर्ता को इसकी जानकरी जीएसटीएन पोर्टल में दर्ज करानी होगी। उन्होंने बताया कि ई वे बिल वन के लिए पचास हजार से ऊपर के किसी भी कर योग्य माल प्रांत के बाहर से आयात पर कामर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट की साइट से डाउनलोड किया जा सकेगा। वहीं, वे बिल टू पर प्रांत के अंतर के परिवहन व प्रांत के बाहर विक्रय करने वाले टैक्सेबुल माल के लिए भी कामर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट की साइट पर ही होगा।