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कार्यदायी संस्था की लापरवाही से हुई काउंसलर की मौत!

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बलिया। जिला महिला अस्पताल में तीन दिन पहले पांचवी मंजिल के इंटरनल होल पर लगे कांच के टूटने से गिरकर काउंसलर अर्चना चौबे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग मौन है। कांच के लगाने का तरीका व गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हैरानी की बात है कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी कार्यदायी संस्था की लापरवाही को लेकर जांच तक शुरू नहीं की गई है। वर्ष 2011-12 में जिला महिला अस्पताल में नया भवन बनाने के लिए शासन की ओर से राजकीय निर्माण निगम को जिम्मेदारी दी गई। भवन वर्ष 2017 में बनकर तैयार हुआ और कार्यदायी संस्था ने इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया। छह फरवरी को महिला अस्पताल की काउंसलर अर्चना चौबे ओपीडी में मरीज नहीं होने के कारण धूप सेंकने के लिए एक अन्य महिला स्वास्थ्य कर्मी के साथ अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर पहुंची। छत पर इंटरनल होल पर लगे कांच पर वह ज्योंही खड़ी हुईं कि कांच टूट गया और वह सीधे भूतल पर जा गिरीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसको लेकर कार्यदायी संस्था पर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि किसी भी कार्य के लिए भवन के छत पर किसी को जाना पड़ सकता है। इसको देखते हुए सुरक्षा के माकूल इंतजाम नहीं किए गए थे। बताया जाता है कि इंटरनल होल करीब ढाई फुट रेडियस का है। होल को सामान्य कांच से बंद कर उसके चारों ओर महज चार इंच उंची ईंट की पैकिंग की गई थी। सुरक्षा के लिहाज से देखें तो इतनी ऊंचाई पर कांच लगाने से पहले या तो लोहे की ग्रिल लगानी चाहिए थी या फिर रुफ ग्लास का इस्तेमाल करना चाहिए था ताकि कोई गलती से उस ओर से जाए तो सुरक्षित रहे। लोगों की मानें तो कहीं न कहीं इस बड़ी घटना में कार्यदायी संस्था की लापरवाही है। लेकिन घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद नहीं खुल रही है और अभी तक कोई पड़ताल की कार्रवाई भी नहीं शुरू की गई है। डा एसपी राय, सीएमओ, बलिया ने कहा कि जिस नवनिर्मित जिला महिला अस्पताल की छत से काउंसलर की गिरकर मौत हुई है। उसमें लगा कांच मानक के हिसाब से लगा था या नहीं, इसको लेकर सवाल उठना लाजिमी है, यह जांच का विषय है, हालांकि अभी तक भवन को कंप्लीट कर कार्यदायी संस्था द्वारा स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है। फिर भी इसपर गौर किया जा रहा है।
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