बांसडीह (बलिया)। शासन के निर्देश के बाद भी तहसील क्षेत्र के रेंगहा गांव के कुछ बाढ़ पीड़तों को अभी तक राहत सामग्री न मिलने से जनाआक्रोश बढ़ता जा रहा है। राहत वितरण को लेकर भाजपा नेता व प्रधान समर्थकों में कहासुनी हो गई। हालांकि तहसीलदार ने मौके पर पहुंच कर मामले को शांत कराया और सभी बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण कराने का आश्वासन दिया। भाजपा नेता ने प्रधान समर्थकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।
रेंगहा गांव के बाढ़ पीड़ितों ने शासन व प्रशासन पर यह आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन गांव के कुछ लोगों के कहने पर एक जगह बैठ कर सूची तैयार कर ली है। जिसमें किसी के एक ही घर के तीन-चार लोगों का नाम है तो किसी घर का एक भी सदस्य का नाम नहीं है। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि सूची में 275 परिवारों का नाम है। जबकि लगभग 360 परिवार बाढ़ की चपेट में हैं। एक दिन पहले शनिवार को शासन द्वारा रेंगहा गांव के बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण किया गया। इस दौरान लेखपाल द्वारा सूची में अंकित नाम न मिलने से नाराज बाढ़ पीड़ितों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की। जिस पर वहां मौजूद कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार से इसकी शिकायत किया और जिनका नाम सूची में नहीं है, उनका नाम सूची में अंकित कर उन्हें भी राहत सामग्री वितरण करने की मांग की। इसके अलावा राहत सामग्री ग्राम प्रधान के दरवाजे पर न वितरण कर किसी सार्वजनिक स्थल पर वितरण किया जाए। मौके पर मौजूद हल्का लेखपाल से बात होने के दौरान प्रधान व उनके समर्थकों से भाजपा कार्यकर्ताओं में कहासुनी हो गई। जिसकी सूचना मिलते ही तहसीलदार शिवसागर दुबे मौके पर पहुंच गए और बताया कि सूची के अनुसार वितरण कराया गया है जो लोग छूट गए हैं उनको भी राहत सामग्री वितरण किया जाएगा। भाजपा कार्यकर्ता अभिषेक सिंह ने प्रधान व उनके सहयोगियों के खिलाफ सहतवार थाना में तहरीर दिया।
उधर घाघरा और गंगा के बाढ़ से प्रभावित इलाकों में रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। लोग प्रशासन से सहायता मांग रहे हैं। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने रविवार को बाढ़ राहत सामग्री वितरण व्यवस्था व कटान क्षेत्र का जायजा लिया। बांसडीह तहसील क्षेत्र के टिकुलिया में बाढ़ से क्षतिग्रस्त बंधा व सड़क को भी देखा। उन्होंने सुल्तानपुर, भोजपुरवा व ककरघट्टा में भी घाघरा नदी के तेवर का जायजा लिया। ककरघट्टा में कटानरोधी कार्य से कटान रुकने पर संतोष जाहिर किया। हालांकि जलस्तर में भी घटाव दर्ज किया जा रहा है। टिकुलिया में पानी की वजह से टूटी सड़क की पटरी के बाबत जिलाधिकारी ने कहा कि पानी कम होते ही इसको दुरुस्त करा दिया जाएगा। लेकिन उधर बांसडीह में रेंगहा गांव के कुछ बाढ़ पीड़तों को अभी तक राहत सामग्री नहीं मिलने से जनाआक्रोश बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेता व प्रधान समर्थकों में कहासुनी हो गई। हालांकि तहसीलदार ने मौके पर पहुंच कर मामले को शांत कराया और सभी बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण कराने का आश्वासन दिया। भाजपा नेता ने प्रधान समर्थकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।
नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ से घिरे गांवों में राहत सामग्री वितरित करने का सिलसिला लगातार जारी है। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत स्वयं इस वितरण कार्य पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। रविवार को उन्होंने बांसडीह तहसील के बाढ़ प्रभावित मजरों में राहत सामग्री वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। चांदपुर डाकबंगले पर हो रहे वितरण के दौरान पहुंचे जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर पीड़ित तक राहत सामग्री पहुंचनी चाहिए। इसके साथ ही प्रति परिवार पांच लीटर मिट्टी तेल भी देने को कहा। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि पशुओं के लिए भूसा का भी वितरण होगा। जरूरत पड़ने पर हर प्रकार की सहायता के लिए जिला प्रशासन तैयार है। मौके पर मौजूद एसडीएम व तहसीलदार को निर्देश दिया कि घाघरा नदी के उस पार के गांवों में भी जाकर जायजा लेते रहें। वहां भी हर परिवार को राहत सामग्री के पैकेट के साथ 10 किलो आलू व पांच लीटर मिट्टी तेल का वितरण अनिवार्य रूप से हो जाए। किसी भी हालत में बाढ़पीड़ितों को कोई तकलीफ नहीं होने देना है।
इसी तरह से शहर के निचले इलाकों में गंगा की बाढ़ का पानी भरने से दर्जनों घर घिरे हुए हैं। प्रशासन व नगर पालिका की ओर से अभी तक कोई राहत कार्य शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों के बीच आक्रोश पनपने लगा है। शहर के कुछ हिस्सों में रहने वाले लोगों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। लोग अपने ही घरों के छतों पर अपना गुजारा कर रहे है।
नगर के निचले इलाके में गंगा के बाढ़ का पानी करीब एक सप्ताह से लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। आलम यह है कि दिन के समय तो ठीक है रात में पानी बढ़ने से रिहायशी इलाकों में मकान बनाकर रह रहे लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है। लोग खाने तक के मोहताज हो गए हैं। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी उसी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। वहीं नगर पालिका प्रशासन की ओर से खाने-पीने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में बड़े-बुजुर्गों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ित राम नाथ का कहना है कि हर बार बाढ़ आने के बाद जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन की ओर से डोंगी और खाने-पीने की व्यवस्था की जाती थी। बाढ़ पीड़ित बेचन प्रसाद का कहना है कि नपा प्रशासन इस बार के बाढ़ के दौरान उदासीनता बरत रहा है।