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विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में मरीज रेफर

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बलिया। जिला अस्पताल संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में गंभीर मरीज रेफर किए जा रहे। ऐसे में प्रदेश सरकार के तमाम दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। वहीं, शहर में ट्रामा सेंटर बनकर तैयार है लेकिन आज तक उसका संचालन नहीं किया जा सका।
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जिला अस्पताल में मरीजों के लिए 326 बेड की व्यवस्था है लेकिन वर्तमान में लगभग 250 बेड ही संचालित हो रहे है। जिसके सापेक्ष रेडियोलाजिस्ट समेत मात्र 20 चिकित्सक तैनात हैं, जबकि 10 चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। अस्पताल में न तो न्यूरो सर्जन है और न ही मानसिक रोग चिकित्सक है। इसके अलावा गंभीर उपचार के लिए कोई संसाधन नहीं है। आईसीयू तक की व्यवस्था यहां नहीं है, जिस कारण हेड इंजरी के मामलों में चिकित्सकों को रेफर करना मजबूरी हो जाती है। इसके अलावा 170 बेड पर 30 चिकित्सक के तैनाती का मानक है तो 326 बेड पर दो गुना होना चाहिये। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सीमित संसाधन व सीमित चिकित्सक के भरोसे ही जिला चिकित्सालय संचालित हो रहा है।
इस बाबत प्रभारी सीएमएस डा. एसपी राय ने बताया कि जितना संसाधन व चिकित्सक है, उन्हीें से किसी प्रकार काम चलाया जा रहा है। गंभीर मरीजों को रेफर करना मजबूरी है।
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इनसेट=
शोपीस बना है डेढ़ करोड़ की लागत से बना ट्रामा सेंटर
बलिया। पूर्व मंत्री नारद राय के प्रयास से जिला अस्पताल परिसर में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर बनवाया गया। लेकिन ट्रामा सेंटर का भवन तो बनकर तैयार हो गया। उसमें न तो आज तक विशेषज्ञ चिकित्सकाें की तैनाती हो सकी और नहीं इलाज के लिए कोई उपकरण लगाए गए। शासनादेश के अनुसार ट्रामा सेंटर में रेडियोलाजिस्ट दो, आर्थो सर्जन दो, सर्जन दो, स्टाफ नर्स पांच, स्वीपर पांच तथा वार्ड ब्वाय पांच होना चाहिये। इसके अलावा सीटी स्केन, वेंटीलेेटर तथा डिजिटल एक्स-रे होना चाहिये। इनके अभाव में ही पूर्व मंत्री नारद राय ने ट्रामा सेंटर का लोकार्पण कर चालू कर दिया। जिसमें जिला अस्पताल के दो चिकित्सकों की तैनाती की गई है।
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