रामगढ़। गंगा के कटान से विस्थापित कटान पीड़ितों को शासन स्तर से भूमि क्रय कर बसा तो दिया गया। लेकिन आज तक सरकारी योजनाओं का लाभ इन पीड़ितों को नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि गंगा के कटान के बाद 50 परिवार के लोग अन्यत्र ग्राम सभा में जाकर बस गए हैं। जिसके चलते शौचालय, आवास, राशन के साथ ही विस्थापित बस्ती का चहुंमुखी विकास से अछूता है।
वर्ष 2016 की बाढ़ में ग्रामसभा के केहरपुर के पुरवा श्रीनगर, गंगौली का नामोनिशान गंगा की लहरों ने मिटा दिया। शासन स्तर से जमीन क्रय कर ग्रामसभा बलिहार में 50 कटान पीड़ितों को बसा दिया गया। लेकिन जब मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने की बात आई तो ग्राम प्रधानों ने कन्नी काटना शुरू कर दिया। कहने लगे कि आपके आधार कार्ड में पता केहरपुर ग्राम सभा का है तो लाभ केहरपुर ग्रामसभा से ही मिलेगा। जबकि केहरपुर के ग्राम प्रधान का कहना है कि दूसरे ग्राम सभा में बस गए हैं तो आपको वहां से ही शौचालय, आवास सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इन्हीं मकड़जालों में फंसकर आज ये कटान पीड़ित योजनाओं का लाभ पाने से वंचित रह गए हैं। आलम यह है कि इन बस्ती वालों के पास न तो शौचालय है और न ही आवास है। सबसे विकट स्थिति तो बरसात के मौसम में हो जाता है।
पीड़ित हीरा गोंड का कहना है कि जब हम केहरपुर के प्रधान के पास जाते है तो वो कहते हैं कि आप अन्यत्र गांव में जाकर बस गए हैं यदि कोई शासनादेश आएगा तो आपको शासन की योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। रमाशंकर सिंह का कहना है कि एक तो हम लोग पहले से गंगा की मार झेलकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। दूसरे में हम पीड़ितों को कोई भी पूछने वाला नहीं है। ग्राम प्रधान केहरपुर विजयकांत पांडेय का कहना है कि पीड़ित हमारे ग्राम से जाकर दूसरे ग्राम सभा में बस गए हैं। ऐसे में अगर खंड विकास अधिकारी इन पीड़ितों को शौचालय सहित अन्य लाभ दिलाने का आदेश करते हैं तो इन लोगों को भी सरकार की योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। खंड विकास अधिकारी बैरिया रणजीत सिंह का कहना है कि जो जहां बस गया है अपने आधार कार्ड पर पता बदलवा दे। तभी उसे सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा।