जिले में लाख प्रयास के बाद भी शौचालय निर्माण में तेजी नहीं आ रही है। इसके चलते गांवों को ओडीएफ करने की सरकारी दावों की हवा निकल गई है। अब तक कुल 103 गांवों को ओडीएफ किया गया है और 15 गांव सत्यापन के चलते रुके हैं। वहीं बीते माह निर्धारित लक्ष्य 32 हजार 340 के बजाय महज 629 ही शौचालय बनाए जा सके हैं।
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत जिले के कुल 1843 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए कुल तीन लाख 87 हजार 980 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। लेकिन लाख प्रयास के बावजूद शौचालय निर्माण की गति जोर नहीं पकड़ रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है बीते माह में कुल 32 हजार 340 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन महज 629 शौचालयों का ही निर्माण हो सका जो माह के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 1.94 फीसदी है। पंचायती राज विभाग की ओर से शासन को भी यह रिपोर्ट भेजी गई है। अधिकारियों की मानें तो अब तक कुल 103 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है और 15 गांव भी ओडीएफ के लिए तैयार है केवल मंडल स्तरीय सत्यापन होना बाकी है। इसके अलावा अन्य 75 गांवों को ओडीएफ करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें बैरिया ब्लाक के आठ, बांसडीह के चार, बेलहरी के19, बेरुआरबारी के आठ, चिलकहर के एक, दुबहड़ के 19, गड़वार के सात, हनुमानगंज के दो, मुरलीछपरा के सात, रेवती के पांच, सीयर के तीन, सोहांव के 20 गांव हैं। लेकिन अधिकांश ओडीएफ गांवों में जमीनी हकीकत कुछ और ही है और शौचालय निर्माण का कार्य भी अधूरा है।
शहर से सटे दुबहड़ ब्लाक के जमुआ गांव को ओडीएफ कर दिया है। बताया कि इस गांव को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2016-17 में 520 शौचालयों के निर्माण के लिए कुल 62 लाख 40 हजार की धनराशि विभाग से मुहैया कराई गई। लेकिन वर्ष 2018 अब बीतने को है लेकिन अधिकांश शौचालयों का निर्माण अधर में लटका है। बतौर उदाहरण गांव की लाभार्थी सरिता यादव के शौचालय को देखें तो अभी तक इस पर छत नहीं पड़ सका है जबकि रंगाई पोताई आदि कराकर इसे निर्धारित ऐप पर टैगिंग कर दिया है। यह तो महज उदाहरण है यही हाल अधिकांश गांवों की है।
इस बाबत जिला पंचायत राज अधिकारी अभय कुमार यादव ने बताया कि पिछले कई माह से बालू नहीं मिलने व महंगा होने के कारण निर्माण कार्य अवरुद्ध हुआ है। इस बाबत उच्चाधिकारियों समेत शासन को भी अवगत कराया गया है। अब निर्माण कार्य में तेजी आई और लक्ष्य को समय पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।