बलिया। केंद्र सरकार चरमराती अर्थव्यवस्था के चलते कठघरे में है। नोटबंदी और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के कारण आम आदमी की घटती क्रय शक्ति ने मंदी को हवा दी है तथा सरकार की राजनैतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। उक्त बातें गंगा मुक्ति आंदोलन के नेता रमाशंकर तिवारी ने विज्ञप्ति जारी कर कहीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि वह बेकारी की मार झेल रहे युवाओं में आशा के संचार के लिए आवश्यक उपाय करे। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का पड़ता असर अब सामने आने लगा है। जिसके चलते सूखा और बाढ़ से आ रही आपदा डरावना सपना दिखा रही है। सरकार युवाओं को नौकरियां उपलब्ध कराने का उपक्रम चलाए। चाहे वह सरकारी क्षेत्र की हो या फिर निजी क्षेत्र की। बेकारी का दर्द निराशा को जन्म देगा। जिसके प्रति सरकार को सजग हो जाना चाहिए।