बलिया। जिले के कई गांव आज भी बिजली आपूर्ति से कोसों दूर है। आजादी के बाद भी उन्हें आज तक बिजली नसीब नहीं हुई। ऐसे ही गांवों में सहतवार क्षेत्र की छपिया तथा गड़वार विकास खंड के सरयां ग्राम सभा शामिल है।
केंद्रीय बिजली मंत्रालय के एक सर्वे में प्रदेश में मात्र छह गांवों को ही बिजली से वंचित बताया गया है। जबकि जिले में ही सर्वे कराया जाय तो करीब दर्जनभर गांव तथा पुरवे आज भी बिजली से महरूम है। इन गांवोें पर जनप्रतिनिधियों और बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही भारी पड़ रही है। छपिया गांव के लोग आज भी ढिबरी युग में जीने को विवश हैं। गांव के लोगों ने विभागीय कार्यालय में 20 वर्ष पहले से बिजली का कनेक्शन करवा लिया था। गांव के रामशंकर वर्मा, परशुराम वर्मा, लक्ष्मण गोंड, रामलाल मिश्र ने बताया है कि 1996-97 में सब्सिडी के नाम पर विभाग ने यहां पर कई लोगो का कनेक्शन दिया। इसके बाद लोगो को लगा कि अब गांव में बिजली आ जाएगी। दिन बीतते गए लेकिन आस अधूरी रह गई। 2000 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार की योजना से हर गांवों को विद्युतीकरण की घोषणा से उनमें एक बार फिर आस जगी लेकिन गांव में बिजली नहीं आनी थी नहीं आई।
गांव के पूर्व प्रधान राधारमण सैनी ने बताया कि तत्कालीन विधायक शिवशंकर चौहान ने बिजली पहुंचने का आश्वासन दिया था। 2008-09 में विभाग ने पोल गड़वाना शुरू कर दिया। लेकिन बात यहीं पर खत्म हो गई। पोल तो गड़े लेकिन तार नहीं खींचा गया। विभाग से आजिज आए ग्रामीणों ने आखिरकार बगल स्थित बिसौली गांव से बिजली का तार खींच कर बिजली ली। इसे लेकर अक्सर दोनों गांवों के लोग आपस मे लड़ते-झगड़ते रहते है। छपिया ग्राम सभा अंतर्गत दुबेछाप, मांगितछाप गांव भी है। मुख्य राजस्व गांव छपिया को छोड़कर शेष दोनो गावों में विद्युतीकरण हो गया है।