कतर्नियाघाट में मौजूद जयमाला व चंपाकली। - संवाद
बिछिया। कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार पहली नवंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन इस बार जंगल सफारी के दौरान पर्यटक हथिनियों पर सवारी का आनंद नहीं ले सकेंगे। वन विभाग ने बाघ व तेंदुए के सक्रिय इलाकों में गश्त बढ़ा दी है, इसके लिए हथिनी जयमाला और चंपाकली को रिजर्व में रखा गया है।
कतर्नियाघाट रेंज में इस बार पर्यटक सिर्फ हथिनियों को निहार सकेंगे, मगर उनकी पीठ पर बैठकर सवारी नहीं कर पाएंगे। वन विभाग ने जयमाला और चंपाकली को बाघ व तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों में कॉम्बिंग और गश्त के लिए आरक्षित कर दिया है। जंगल खुलने से पहले वन सुरक्षा को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
रेंजर आशीष गौड़ ने बताया कि कतर्नियाघाट जंगल खुलने के साथ ही पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है। इस दौरान कई बार वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में घुस जाते हैं या मानवीय गतिविधियों से खतरा उत्पन्न होता है। ऐसे में हथिनियों की मदद से टीम को गश्त और निगरानी में काफी सहूलियत होती है।
उन्होंने कहा कि बाघ और तेंदुए के मूवमेंट वाले इलाकों में फिलहाल नियमित कॉम्बिंग की जा रही है। इसलिए जयमाला और चंपाकली को सवारी के लिए प्रस्तावित नहीं किया गया है। आगे अधिकारियों के आदेश और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद अगला निर्णय लिया जाएगा।
वन विभाग के अनुसार जंगल खुलने के बाद सफारी व्यवस्था, गश्त, पर्यटक प्रबंधन और सुरक्षा मानकों को अंतिम रूप दिया जाएगा। विभाग का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी प्रकार का ऐसा कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे गश्त व्यवस्था प्रभावित हो।