बहराइच। मोबाइल फोन का इस्तेमाल बातचीत और मनोरंजन तक सीमित रहने वाली तराई क्षेत्र की महिलाएं अब तेजी से डिजिटल दुनिया का हिस्सा बन रही हैं। बैंक खाते के संचालन, ऑनलाइन भुगतान, सरकारी योजनाओं की जानकारी, बच्चों की पढ़ाई और रोजगार-स्वरोजगार तक मोबाइल और इंटरनेट उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में जगह बना रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-6 के आंकड़े भी महिलाओं की डिजिटल पहुंच में आए इस बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं।
वर्ष 2019-21 में एनएफएचएस-5 सर्वे में बहराइच की 15-49 वर्ष आयु वर्ग की 24.5 प्रतिशत महिलाओं के इंटरनेट इस्तेमाल करने का आंकड़ा दर्ज हुआ था। वर्ष 2023-24 के दौरान एनएफएचएस-6 सर्वे में यह बढ़कर 65.7 प्रतिशत हो गया। यानी करीब चार साल में महिलाओं के इंटरनेट इस्तेमाल में 41.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखी। इसी अवधि में पुरुषों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की हिस्सेदारी 32.6 प्रतिशत से बढ़कर 79 प्रतिशत हो गई। पुरुषों की डिजिटल पहुंच अभी भी अधिक है, लेकिन महिलाओं की तेज बढ़ोतरी ग्रामीण समाज में बदलती डिजिटल तस्वीर को दिखाती है।
बैंकिंग और मोबाइल तक पहुंच भी बढ़ी
डिजिटल बदलाव का असर बैंकिंग और मोबाइल के इस्तेमाल में भी दिखाई दे रहा है। बैंक या बचत खाता रखने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 61.9 प्रतिशत से बढ़कर 79.3 प्रतिशत हो गई। वहीं, मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं का आंकड़ा भी 39.6 प्रतिशत से बढ़कर 54 प्रतिशत पहुंच गया। बहराइच में करीब 16,500 स्वयं सहायता समूह से लगभग दो लाख महिलाएं जुड़ी हैं। इन समूहों ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने में मदद की है। मोबाइल और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार से बैंक शाखा पर निर्भरता भी कम हुई है।
शिक्षा के स्तर में भी सुधार
महिलाओं की शिक्षा के स्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। एनएफएचएस-5 में 15-49 वर्ष आयु वर्ग की 14.4 प्रतिशत महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा हासिल की थी। एनएफएचएस-6 में यह आंकड़ा बढ़कर 21.1 प्रतिशत हो गया। पुरुषों में इसी अवधि में यह हिस्सेदारी 22.1 प्रतिशत से बढ़कर 27.4 प्रतिशत हुई।
गांव की चौखट से डिजिटल दुनिया तक
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बचत, छोटे कारोबार और स्वरोजगार की गतिविधियों में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रही हैं। ऑनलाइन भुगतान और बैंकिंग सेवाओं ने आर्थिक गतिविधियों को आसान बनाया है। हालांकि डिजिटल पहुंच बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है। महिलाओं को ओटीपी, एटीएम पिन, बैंकिंग पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करने तथा संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रखें
एसडीएम मिहींपुरवा मोनालिसा जौहरी के अनुसार महिलाओं को डिजिटल रूप से सक्षम बनाना उन्हें सरकारी योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों से सीधे जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं को मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर बैंकिंग, शिक्षा, सरकारी सेवाओं और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का लाभ लेने में करना चाहिए। इसके साथ साइबर सुरक्षा की जानकारी भी जरूरी है।
डिजिटल दक्षता से आर्थिक आत्मनिर्भरता
श्रावस्ती किसान सहकारी चीनी मिल की प्रधान प्रबंधक भूमिका यादव का कहना है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और डिजिटल दक्षता अब एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। महिलाओं के हाथ में मोबाइल और बैंकिंग की जानकारी होने से वे आर्थिक फैसलों में अधिक भागीदारी कर सकती हैं। ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान और वित्तीय सेवाओं की जानकारी देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है।
अवसरों के साथ सुरक्षा की चुनौती
महिला पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. प्रो. प्रिया मुखर्जी के अनुसार डिजिटल दुनिया महिलाओं के लिए नए अवसरों के साथ सुरक्षा की चुनौती भी लेकर आई है। किसी अनजान व्यक्ति से बैंकिंग या निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर अपराध होने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन की मदद लेनी चाहिए।
आंकड़ों में महिलाओं की बढ़ती डिजिटल ताकत
संकेतक एनएफएचएस-5 एनएफएचएस-6 बदलाव
इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं (%) 24.5
65.7
41.2 प्रतिशत अंक बढ़ोतरी
खुद इस्तेमाल करने वाला बैंक/बचत खाता (%) 61.9
79.3
17.4 प्रतिशत अंक बढ़ोतरी
खुद इस्तेमाल करने वाला मोबाइल फोन (%) 39.6
54.0
14.4 प्रतिशत अंक बढ़ोतरी
10 वर्ष या अधिक की स्कूली शिक्षा वाली महिलाएं (%) 14.4
21.1
6.7 प्रतिशत अंक बढ़ोतरी
आधार : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5 : 2019-21, NFHS-6 : 2023-24) तथा बहराइच से संबंधित उपलब्ध आंकड़े।
डिजिटल दुनिया में बढ़ी महिलाओं की सक्रियता।
डिजिटल दुनिया में बढ़ी महिलाओं की सक्रियता।