बौंडी। कछार इलाके में भेड़िये का आतंक लगातार बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को खेत में चारा काट रही एक युवती को भेड़िये ने घायल कर दिया, जबकि बरामदे में सो रहे बुजुर्ग पर भी उसने झपट्टा मारा। घटनाओं से लोगों में दहशत है।
अब हालत यह है कि कछार के करीब दस गांवों में बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद ड्रोन और थर्मल कैमरों से भी भेड़िये का पता नहीं चल पा रहा है।
मंझारा तौकली के मजरा प्यारेपुरवा निवासी निरंकार की 25 वर्षीय बेटी मनीषा बृहस्पतिवार को चारा काटने खेत गई थी। इसी दौरान गन्ने के बीच से अचानक निकले भेड़िये ने उस पर हमला कर दिया। युवती की चीख सुनकर ग्रामीण दौड़े तो भेड़िया भाग गया। घायल मनीषा को सीएचसी फखरपुर ले जाया गया।
भौंरी गांव निवासी जनार्दन प्रसाद लोधी पर भी भेड़िये ने हमला करने की कोशिश की। वे बरामदे में मच्छरदानी लगाकर सो रहे थे। अचानक भेड़िये ने झपट्टा मारा लेकिन वह मच्छरदानी में उलझ गया इससे जनार्दन बच गए।
दहशत में ग्रामीणों की रातें
बभननपुरवा के देशराज ने बताया कि ट्रॉली पर अस्थायी आशियाना बना लिया है। उन्होंने बताया कि गांव वाले अब घरों में सोने से डरते हैं और पूरी रात ट्रॉलियों व ऊंचे स्थानों पर पहरा देते रहते हैं।
बारिश के कारण प्रभावित हुआ सर्च ऑपरेशन
रेंजर ओंकार नाथ यादव ने बताया कि प्रभावित गांवों में 15 सीसीटीवी कैमरे, थर्मल ड्रोन और तीन पिंजरे लगाए गए हैं। 94 वनरक्षक और मंडल स्तरीय अधिकारी मौके पर डेरा डाले हुए हैं। लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है। बारिश के कारण भी सर्च ऑपरेशन प्रभावित हुआ है।
10 गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त
मंझारा तौकली, हरिरामपुरवा, नरेशपुरवा, इच्छारामपुरवा, गांधीगंज, नंदवल के केसरीपुरवा, बहोरवा और सिपहिया हुलास गांव के लोग भेड़िये के खौफ में हैं। बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।