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बिना सड़क बनाए ही 6.55 लाख रुपये निकाले

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उर्रा (बहराइच)। रुस्तमपुरवा गांव में चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के तहत वर्ष 2016-17 में खड़ंजा का निर्माण कार्य दिखाकर 6.55 लाख रुपये निकाल लिए गए, जबकि मौके पर खड़ंजे का निर्माण ही नहीं कराया गया है। इसकी जानकारी होने पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख ने मौके का मुआयना कर मुख्य विकास अधिकारी से शिकायत की। इस पर सीडीओ ने टीम गठित कर मामले की जांच कराई, जिसमें मौके पर खंड़जे का निर्माण नहीं मिला। लेकिन कार्रवाई से बचने के लिए ब्लॉक के अधिकारियों ने खड़ंजे का निर्माण शुरू करा दिया है।
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मिहींपुरवा विकास खंड में बिना निर्माण के ही बजट का बंदरबांट करने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। विकास खंड के ग्राम सोंगवा में बिना निर्माण के ही लाखों रुपये का बंदरबांट कर लिया गया। इसी तरह सुजौली में हुए घोटाले की मुख्य विकास अधिकारी ने जांच की। अभी इन गांवों का मामला शांत ही नहीं हुआ था कि विकास खंड की ग्राम पंचायत मनगौढ़िया का मामला सामने आ गया है।
मनगौढ़िया ग्राम पंचायत के रुस्तमपुरवा में बशीर के खेत के निकट से खड़ंजा निर्माण के नाम पर छह लाख 55 हजार रुपये निकाल लिए गए। जबकि मौके पर सड़क का निर्माण ही नहीं कराया गया है। यह निर्माण चतुर्थ राज्य वित्त योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 में दिखाया गया है। लेकिन तीन वर्ष बाद भी निर्माण नहीं हुआ है। इसकी जानकारी गांव के लोगों को हुई तो उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों से शिकायत की।
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मिहींपुरवा के पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्रवण मदेशिया ने गांव पहुंचकर जानकारी ली तो बिना सड़क निर्माण के ही 6.55 लाख रुपये निकालने का मामला सामने आया। विश्व हिंदू परिषद के संदीप सिंह ने घोटाले का आरोप लगाया। इस पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख ने मुख्य विकास अधिकारी अरविंद चौहान से शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ने बीडीओ की अगुवाई में जांच टीम गठित कर रिपोर्ट तलब की। उधर, कार्रवाई के डर से विकास विभाग ने सड़क का निर्माण गांव में शुरू करा दिया है। ऐसे में विकास विभाग के कर्मचारियों पर भ्रष्ट नीति पर सवाल उठ रहे हैं।
मौके पर नहीं मिला निर्माण
सीडीओ द्वारा गठित टीम के जांच अधिकारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अमरनाथ कटियार ने बताया कि उन्होंने मनगौढ़िया गांव में मामले की जांच की तो मौके पर कोई निर्माण नहीं मिला है। बाकी बजट निकलने की जानकारी उन्हें नहीं है। डॉ. कटियार ने बताया कि उनके जांच के दूसरे दिन बीडीओ ने जांच की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ द्वारा कार्रवाई की जाएगी। उधर, बीडीओ का पक्ष जानने के लिए फोन मिलाया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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