जरवलरोड। सरयू नदी स्थित संजय सेतु की मरम्मत के चलते मुख्य पुल पर आवागमन दो माह के लिए बंद है, वहीं अब पूरे इलाके की जीवनरेखा बने पीपा पुल पर हर दिन हालात बदल रहे हैं। पानी के बहाव के साथ रोज पुल का संतुलन तय होता है, हर दिन नई चुनौती के हिसाब से रोज व्यवस्था भी बदलनी पड़ रही है।
सुबह होते ही पुल पर ट्रैक्टर, बाइक और पैदल यात्रियों की लंबी कतार लग जाती है, लेकिन यहां कोई स्थायी ट्रैफिक सिस्टम नहीं है। स्थानीय युवक और नाविक मिलकर जुगाड़ ट्रैफिक सिस्टम चला रहे हैं। कभी एक तरफ से वाहनों को रोका जाता है, तो कभी दूसरी तरफ से छोड़ा जाता है। सीटी व इशारे ही यहां के ट्रैफिक सिग्नल हैं।
सबसे बड़ी चुनौती सरयू के बदलते बहाव की है। नदी का पानी बढ़ने या घटने के साथ पीपा पुल के संतुलन को रोज ठीक करना पड़ता है। कई बार रात में भी कर्मियों को लगकर रस्सियों और पीपा को दुरुस्त करना पड़ता है, ताकि सुबह तक आवागमन चालू रह सके।
स्थानीय नाविक राजकिशोर और राधेश्याम बताते हैं कि यह पुल हर दिन नया बनाना पड़ता है। पानी का मिजाज बदला नहीं कि पूरा संतुलन बिगड़ जाता है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यही पुल इस समय उनकी सबसे बड़ा सहारा है, वरना उन्हें कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अजीत कुमार सिंह ने बताया कि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं, लेकिन नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से दिक्कत आ रही है, भीड़ के समय हालात चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। खासकर शाम के वक्त जब लोग काम से लौटते हैं, तब पुल पर दबाव काफी बढ़ जाता है।
एनएचएआई के अवर अभियंता अनंत मौर्या ने बताया कि संजय सेतु की मरम्मत तेजी से कराई जा रही है। कोशिश है कि समय से पहले काम पूरा हो। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद 10 वर्षों तक निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी।