मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले में फरार चल रहे उर्रा निवासी डॉ. वीरेंद्र कुमार पर मध्यप्रदेश पुलिस का शिकंजा बढ़ता जा रहा है। मंगलवार रात रीवा की पुलिस डॉ. वीरेंद्र की तलाश में उर्रा पहुंची। मिहींपुरवा पुलिस की सहयोग से घर पर दबिश दी गई लेकिन डॉ. वीरेंद्र नहीं मिले। इस पर फरारी पंचनामा भरकर रीवा पुलिस टीम लौट गई। गौरतलब है कि दो दिन पूर्व भोपाल की एसटीएम टीम ने भी छापेमारी की थी लेकिन उसे भी डॉ. वीरेंद्र की भनक नहीं लग सकी थी।
मध्यप्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के घोटाले में मोतीपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत उर्रा गांव निवासी चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र कुमार भी शामिल हैं। उनके खिलाफ मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिविल लाइन थाने में धारा 419, 420, 467, 468, 471, 109 और 120 बी के तहत केस दर्ज है। डॉ. वीरेंद्र पर भी वर्ष 2009 में व्यापमं में दूसरे स्टूडेंट की जगह एक्जाम देने का आरोप है। घोटाले में शामिल होने की पुष्टि होने के बाद से वह फरार चल रहे हैं। अब डॉ. वीरेंद्र की तलाश में उनके पुश्तैनी आवास मिहींपुरवा के उर्रा में नजर रखी जा रही है। अब तक तीन बार एसटीएफ छापेमारी कर चुकी है। सोमवार को भोपाल एसटीएफ की टीम वीरेंद्र को तलाश कर लौटी थी तभी मंगलवार रात रीवा के सिविल लाइन थाने के उपनिरीक्षक सतीश कुमार द्विवेदी की अगुवाई में टीम डॉ. वीरेंद्र को तलाशते हुए उर्रा पहुंची। टीम में सब इंस्पेक्टर के अलावा सिपाही अनूप त्रिपाठी और धर्मेंद्र मिश्रा शामिल थे।
उपनिरीक्षक सतीश ने बताया कि मोतीपुर पुलिस को सूचना देने के बाद जालिमनगर चौकी से सिपाही भोला यादव और विनय को साथ लेकर डॉ. वीरेंद्र के उर्रा स्थित आवास पर दबिश दी गई लेकिन न तो डॉ. वीरेंद्र मिले न ही परिवार का कोई सदस्य।