फखरपुर। कागजों में एसआईआर फॉर्म की प्रक्रिया दुरुस्त बताई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत बदतर है। शुक्रवार को फखरपुर कार्यालय में ताला लटक रहा था। नोटिस पाए ग्रामीण अधिकारियों के सामने हाजिरी लगाने के लिए परेशान हैं। अगर देर सबेर अधिकारी मिलते भी हैं तो उन्हें तारीख पर तारीख मिल रही है।
माधोपुर निवासी नाजिर अली सप्ताह भर से ब्लॉक कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे। शुक्रवार सुबह एआरओ कार्यालय पहुंचे तो ताला लटकता मिला, इस पर उन्होंने बीएलओ से संपर्क किया। कई घंटे के इंतजार के बाद दोपहर को उनके कागजों पर मुहर लग सकी।
परिवार में कोई नहीं, कैसे साबित करें नागरिकता
मोनू की पत्नी नाजरीन का मामला और भी संवेदनशील है। बचपन में माता-पिता का साया उठ गया। नाना-नानी ने पाला, अब वे भी नहीं रहे। ऐसे में विभाग उनसे ऐसे दस्तावेज मांग रहा है, जिन्हें जुटा पाना उनके लिए लगभग असंभव है। माधौपुर निवासी नाजरीन का कहना है कि जब परिवार में कोई है ही नहीं तो वह अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कागजात कहां से लाएं।
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कागज के बाद भी अटकी फाइलें
फखरपुर के नसीम के बेटे जानू और रहमान ने 2003 की वोटर लिस्ट में पिता का नाम अधिकारियों को दिखाया, फिर भी फाइल आगे नहीं बढ़ी। ग्रामीण का कहना है कि आवेदन में कमी क्या है, यह तक स्पष्ट नहीं किया जा रहा। सुबह से शाम तक चक्कर काटने के बावजूद समाधान नहीं मिल रहा। कभी ताला बंद मिलता है तो कभी अधिकारी गायब रहते हैं।
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जांच कराई जाएगी
खंड विकास अधिकारी प्रतीक सिंह का कहना है कि उन्हें बेहलारी व अन्य गांवों की जिम्मेदारी मिली है। एआरओ और गन्ना विभाग के अधिकारियों को भी अलग-अलग इलाकों की जिम्मेदारी दी गई है। किस तारीख में किसे बुलाया गया और कौन अधिकारी क्यों सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं था, इसकी जानकारी नहीं है। जांच कराई जाएगी।