कटरा (श्रावस्ती)। राप्ती नदी पर चार पंचायतों के ग्रामीणों ने मिल कर कुछ दिन पूर्व बांस बल्ली का पुल बनाया था। मथुरा घाट के पास बनाए गए इस पुल को शनिवार बलरामपुर प्रशासन ने हटा दिया। प्रशासन इसे अवैध निर्माण बता रहा है। अब जिले के करीब बाईस हजार लोगों को चालीस किलोमीटर घूम कर अपना सफर पूरा करना होगा।
राप्ती नदी जिले को दो भागों में बांटती है। एक हिस्सा नदी का बाया तट जो श्रावस्ती जिले के डिुगुराजोत, राजगढ़ गुलहरिया सहित करीब चौदह गांव शामिल हैं। तो दाएं तट पर बलरामपुर जिले का वीरपुर खैरहनिया, जोगिया सहित कई गांवों के साथ ललिया थाना व शिवपुरा ब्लाक के साथ मथुरा बाजार शामिल है। बाएं तट पर रहने वालों के लिए बलरामपुर क्षेत्र के बाजार या फिर बलरामपुर के बाजार के साथ ही तुलसीपुर व बलरामपुर शहर नदी पा करने से नजदीक हो जाता है। इसी कारण दोनों तरफ पड़ने वाले चार ग्राम पंचायतों के ग्रामीण एकत्र होकर राप्ती नदी पर जलस्तर घटते ही बांस बल्ली व पुआल से अस्थाई पुल का निर्माण कर लेते हैं। इस पुल से मरीजों को दोनो तरफ लाया व ले जाया जाता है। तो साइकिल व मोटर साइकिल के साथ पैदल यात्री आते जाते हैं।
स्थानीय ग्रामीणों की माने तो प्रतिदिन 22-23 हजार लोग इस पुल का इस्तेमाल अपना सफर पूरा करने के लिए करते हैं। लेकिन शनिवार सुबह अचानक बलरामपुर के एसडीएम सदर व ललिया थाना प्रभारी ने इस पुल को अवैध बताते हुए गिरा दिया। इसको लेकर घंटों दोनों तरफ यात्री एकत्र रहे। पुल गिराए जाने की पूर्व सूचना न होने के कारण नदी के बीच से ही पैदल आने का जोखिम उठाते हुए देखे गए। यही नहीं पुल गिराने के साथ साथ प्रशासन ने इस क्षेत्र से पूर्व में हो रहे नौकायन को भी रोक दिया। इसके चलते अब ग्रामीणों को करीब 40 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करके उन बाजारों तक पहुंचना पड़ेगा। जहां वह मात्र दस मिनट में पहुंच जाते थे। वहीं इस संबंध में एसडीएम इकौना रोहित यादव बताते हैं कि यह पुल बलरामपुर जिले में है। वहीं के प्रशासन ने कार्रवाई की है।